लोकतांत्रिक नेपाल में उर्दू को मिला बेहतर मुकामः मशहूद नेपाली

मोहम्मद

काठमांडू। नेपाल में 18वां लोकतंत्र दिवस धूम धाम से मनाया गया। 18 वर्ष पूर्व आज ही के दिन देश में लंबे संघर्षों के बाद गणराज्य का सूर्योदय हुआ था। राजशाही खत्म होने के बाद लोकतांत्रिक नेपाल में यूं तो ढेर सारे बदलाव हुए जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में आया बदलाव सबसे खास है। नेपाल में उर्दू शिक्षा को बढ़ावा और उसे आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में बहुत बेहतर काम हुए हैं। उर्दू शिक्षा और मदरसा शिक्षकों की बेहतरी के लिए नेपाल सरकार में सभी सातों प्रांत में मदरसा बोर्ड का गठन कर इस शिक्षा को बेहतर से बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

लुम्बिनी प्रांत के मदरसा बोर्ड का गठन कैबिनेट की मंजूरी के बाद उपराष्ट्रपति के दस्तखत से हुआ। प्रांतो के समाज कल्याण मंत्रालय ने मदरसा शिक्षा बोर्ड की मान्यता प्रदान की। लुंबिनी प्रदेश के वरिष्ठ माओवादी नेता मशहूर खां नेपाली को बोर्ड का अध्यक्ष नामित किया साथ ही प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान अब्दुल गनी अल काफी को मदरसा संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष नामित किया गया। नेपाल में मदरसा बोर्ड के गठन का लाभ वहां उर्दू शिक्षक और छात्रों को बहुत ही बेहतर तरीके से मिल रहा है।

अब्दुल गनी उल्फी

मशहूद खां नेपाली और अब्दुल गनी अल काफी ने बताया कि आज का दिन नेपाल के लिए स्वर्णिम दिन माना जाता है। आज ही के दिन नेपाली जनता की जीत हुई थी जब तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र शाह का शाही शासन समाप्त हुआ और नए नेपाल की रूपरेखा तैयार की गई। लोकतंत्र की बहाली के लिए   सात राजनीतिक दलों और तत्कालीन विद्रोही सीपीएन-माओवादी माओ वादी केंद्र की भागीदारी के से चले आंदोलन के समक्ष निरंकुश राजशाही को घुटने टेकने को मजबूर होना पड़ा।

राजा ज्ञानेंद्र शाह ने 22 मई 2002 को भंग हुई संसद को बहाल कर दिया। राजनीतिक दलों की मांग के अनुसार, ज्ञानेंद्र ने संसद को बहाल किया और 18 मई का पुनर्गठन संसद के विशेष सत्र ने राजशाही को निलंबित कर प्रधान मंत्री को राज्य के प्रमुख के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया।

नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गिरिजा प्रसाद कोइराला, जो अवामी आंदोलन के कमांडर भी थे, के नेतृत्व में गठित एक सर्वदलीय सरकार ने 10 अप्रेल 2008 को पहला संविधान सभा चुनाव कराया। तत्कालीन सीपीएन-माओवादी माओवादी केंद्र और सरकार के बीच एक व्यापक शांति समझौता हुआ।28 मई 2008 को संविधान सभा की बैठक में नेपाल में राजशाही की समाप्ति की घोषणा की गई और नेपाल को एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना दिया गया।

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