जेल से सरकार चलाकर देश को क्या संदेश देना चाहते हैं केजरीवाल ?

नैतिकता का उपहास उड़ाकर शासन करने का नया फार्मूला गढ़ रहे हैं क्या? जेल से सरकार चलाने का फार्मूला हमें क्यों नही याद आया? सोच सकती हैं उमा भारती झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी हो रहा होगा पश्चाताप?

विजय श्रीवास्तव

लखनऊ। एक नेता थे लाल बहादुर शास्त्री, एक रेल हादसा हुआ, उन्होंने अपना त्याग पत्र तैयार किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को लिख दिया। हालांकि बाद में इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, लेकिन तब लाल बहादुर शास्त्री के चर्चे हर जगह सुनने को मिलने लगे थे। दूसरे मुख्यमंत्री थे हेमंत सोरेन। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से गिरफ्तारी का वारंट निकला, उन्होंने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा और ED के साथ चले गए। उनकी जगह चम्पई सोरेन मुख्यमंत्री बने। लेकिन तीसरा नाम इन दिनों चर्चा में है, वो हैं- आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल। दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। ED ने गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। लेकिन वो बिना इस्तीफा दिए जेल से ही सरकार चला रहे हैं। सोशल मीडिया पर चुटकुला भी उन पर तेजी से वायरल हुआ। ‘वर्क फ्रॉम होम, वर्क फ्रॉम ऑफिस तो सुना था, वर्क फ्रॉम जेल’ का कान्सेप्ट पहली बार चला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया कहते हैं कि भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अब जेल से सरकार चला रहे हैं। इस भ्रष्ट आचरण से केजरीवाल की नैतिकता समाप्त हो चुकी है और दिल्ली की जनता उनसे मुक्ति चाहती है।

इसके पहले मध्यप्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती जो साल 2003 में तीन-चौथाई बहुमत से भाजपा की मुख्यमंत्री बनी थी, पर वर्ष 1994 के हुबली दंगे के संबंध में गिरफ्तारी का वारंट चला, इसकी सूचना मात्र से ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जबकि वो भाजपा की कट्टर हिन्दूवादी फायर ब्रांड नेता थीं और भारी बहुमत से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की सरकार को हराकर मुख्यमंत्री बनी थीं। तब मध्यप्रदेश में उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साधिन्य में जो नैतिकता की घुट्टी उन्हें पिलाई गयी थी, उन्होंने इस्तीफा देने मे जरा भी देर नही लगाई। यूपी बीजेपी के प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में कोई दागी नेता इस तरह जेल में रहकर मंत्री, मुख्यमंत्री नहीं रह सकता। अब चूंकि पूरी की पूरी आम आदमी पार्टी बेईमानी में डूबी हुई है तो ये कुछ भी कर सकते हैं।

बहरहाल नैतिकता को दफन कर केजरीवाल का हठ देश के कितने क्षेत्रों मे नैतिकता का क्षरण कर असमंजस व अराजकता को जन्म देकर सिस्टम को पैरालिसिस करेगा, वक्त के गर्भ में है।  राजनीति के जानकार दर्जनों बुद्धजीवी और सेवानिवृत्त अधिकारी इसे गलत ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि केजरीवाल ने देश में सबसे पहले मुफ्त रेवड़ी बांटने की परम्परा डाली, अब नैतिकता का उपहास उड़ा रहे हैं। जिसका देश पर गलत व दूरगामी असर पड़ेगा। बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता समीर सिंह कहते हैं कि केजरीवाल अभी कोई नया बहाना सोच रहे होंगे। वो जनता को अब बेवकूफ नहीं बना पाएंगे। जनता उनका सच जान गई है और अब सही पार्टी और सही प्रत्याशी के पक्ष में वो ‘कमल’ का बटन दबाएगी।

वहीं बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में भाटिया ने इंडिया गठबंधन और आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर सारे कट्टर बेईमान, पापी और भ्रष्टाचारी हैं तो दूसरी ओर एक ईमानदार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। देश की जनता इन भ्रष्टाचारियों से अपने पैसे का हिसाब मांग रही है। दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय के नौ समन पर उपस्थित नहीं हुए। केजरीवाल अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय गए, जहां उन्हें शराब घोटाले का प्रथम दृष्टया आरोपी ठहराया गया और राहत नहीं दी गई। उन्होंने ED  के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और दोनों ही जगह इनकी याचिका खारिज कर दी गई तथा 15 अप्रैल तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब इस्तीफा न देकर केजरीवाल यह साबित कर चुके हैं कि वो राजनीति के दोमुंहा नाग हैं।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए संजय तो आप ने कहा- सत्य की जीत

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित धनशोधन के एक मामले में आरोपी आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को मंगलवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने श्री सिंह की जमानत अर्जी मंजूर की। सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलने पर उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि हम संजय सिंह को जमानत दे रहे हैं। मुकदमे के लंबित रहने के दौरान उन्हें रिहा किया जाएगा। वह अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रख सकते हैं। न्यायालय ने हालांकि सिंह को सावधान करते हुए कहा कि वह अपनी भूमिका या दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ी किसी भी मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। जानकारों का कहना है कि आम आदमी पार्टी को इस तरह जेल से मिली जमानत को सत्य की जीत नहीं बताना चाहिए। यदि संजय सिंह सच्चे थे तो अब तक कोर्ट में अपनी बेगुनाहीं क्यों नहीं पेश कर पाए।

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