भगवा धारण की ओर श्वेत वस्त्र धारी आचार्य

यशोदा श्रीवास्तव

अंततः कांग्रेस के आचार्य की छुट्टी कर दी गई। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की खूब चर्चा है कि ऐसा कर क्या कांग्रेस ने ठीक किया? भाजपा ने कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि गढ़ने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ा। अब जब आचार्य प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस से छ: साल के लिए निष्कासित कर दिया गया तो हिंदुत्व की धार को तेज करने के लिए भाजपा का बड़ा मुद्दा बनना तय है। निश्चित ही भाजपा लोकसभा चुनाव में घूम घूम कर यह प्रचारित करना नहीं चूकेगी कि कांग्रेस किस हद तक हिंदू विरोधी है कि वह हिन्दुत्व छवि धारी एक आचार्य तक को पार्टी में नहीं रख सकी। मुमकिन है आचार्य प्रमोद कृष्णम स्वयं भी भाजपा के साथ घूमें और कांग्रेस के हिंदुत्व विरोधी छवि की बखिया उधेड़े।

श्वेत वस्त्र धारी आचार्य प्रमोद कृष्णम संभल स्थिति क्लिक धाम पीठ के महंत हैं। भगवाधारी तमाम संतों की तरह श्वेत वस्त्र धारी आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय थे। एक पीठ के आचार्य होते हुए भी उनकी छवि धर्मनिरपेक्ष की रही है और उनकी कांग्रेस में बने रहने का शायद यही पैमाना था। अभी पिछले लोकसभा चुनाव में वे लखनऊ से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं।आचार्य प्रमोद कृष्णम की शानदार खूबी यह है कि उन्हें जितनी गहराई से सनातन धर्म का अध्ययन है उतनी ही गहराई तक इस्लाम धर्म का भी अध्ययन है। उनके तमाम कार्यक्रमों में इस्लाम का बखान सुना जा सकता है। इस वजह से उन्हें कई बार हिंदुत्ववादियों की आलोचना का शिकार भी होना पड़ता था,यह अलग बात है कि वे कभी इसकी परवाह नहीं किए।

भारतीय राजनीति में एक तरह से अलहदा इस राजनेता के विचार में परिवर्तन आना अचंभित करता है। लेकिन राम मंदिर के निर्माण से लगायत उसके उद्घाटन की तिथि आते आते उनके विचारों को हर पल परिवर्तित होते हुए देखा गया। उन्हें बहुत बुरा लगा था जब सोनिया गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने राम मंदिर उद्घाटन में शामिल होने का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया था। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कई मौकों पर इसे कांग्रेस का आत्मघाती कदम बताया था। इसके पहले वे लगातार यह कहकर कांग्रेस पर चोट करते रहे कि कांग्रेस में ढेर सारे ऐसे लोग हैं जो हिंदू विरोधी हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णम की खासियत यह है कि औरों की तरह उन्होंने कांग्रेस को एक झटके में बाय नहीं कहा। उनकी राजनीतिक चातुर्यता ही थी कि उन्होंने अपने बयान बाजी से मजबूर कर दिया कि कांग्रेस उन्हें निष्कासित कर दे। यदि वे छोड़े होते तो शायद हिंदुत्व के बहाने कांग्रेस के खिलाफ वह धार नहीं पैदा कर पाते जो अब कर पाएंगे।

आचार्य प्रमोद कृष्णम पहले अयोध्या निमंत्रण को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते रहे। कांग्रेस ने इसे अनसुनी कर दिया। कल्कि धाम के शिलान्यास के अवसर प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित कर लौटने के बाद उन्होंने मोदी को दैवीय शक्ति धारी महा पुरुष बता कर कांग्रेस नेतृत्व को चिढ़ाया। उसके बाद एक अवसर पर उन्होंने अयोध्या मंदिर निर्माण में मोदी की भूमिका पर गीत गाकर कसीदे पढ़े। कांग्रेस तब भी खामोश थी। इधर हाल में जब नितीश कुमार इंडिया गठबंधन को ठेंगा दिखा कर कांग्रेस से अलग हुए तब आचार्य का कांग्रेस के प्रति तीखी टिप्पणी थी कि नीतीश ने गठबंधन का अंतिम संस्कार कर दिया अब जयंत चौधरी श्राद्ध करेंगे।

कांग्रेस से अलग होने या निष्कासित होने को लेकर आचार्य और कांग्रेस में लुका छिपी होती रही। जाहिर है कांग्रेस भी आचार्य प्रमोद कृष्णम को निष्कासित कर उस तोहमत से बचना चाहती थी जिसकी ताक में भाजपा थी। वो तो आचार्य की बयान बाजी की जब हद हो गई तब कांग्रेस को उनके निष्कासन पर फैसला करना पड़ा। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने बताया कि पार्टी उन्हें न भी निकालती तब भी वे कांग्रेस के खिलाफ जहर उगलने से बाज नहीं आते।

जैसा दिख रहा है उस हिसाब से कांग्रेस से जुदा होने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम का भाजपा के साथ जाना तय है। भाजपा दूसरे दलों के लोगों को चुनावी फायदा नुकसान देख कर ही पार्टी में इंट्री कराती है। चुनावी दृष्टि से आचार्य प्रमोद कृष्णम क्या भाजपा के लिए फायदेमंद होंगे? इस सवाल पर कई लोगों का जो जवाब आया वह यह कि फिलहाल यूपी में भाजपा को किसी आचार्य की जरूरत नहीं है। यूपी की 80 सीटों में से भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलनी तय है लेकिन यह जरूर है कि यहां चौतरफा वार झेल रही कांग्रेस की बखिया उधेड़ने में आचार्य प्रमोद कृष्णम भाजपा के हाथ एक मजबूत हथियार साबित होंगे। क्लिक धाम भले ही यूपी में हो लेकिन इसका महात्म्य हिंदी भाषी प्रांतों तक है। आचार्य प्रमोद कृष्णम के अनुयायी भी उन प्रदेशों तक फैले हुए हैं। भाजपा आचार्य प्रमोद कृष्णम का इस्तेमाल क्लिक धाम और आचार्य के प्रभाव वाले इलाकों तक जरूर करना चाहेगी।

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