अटल बिहारी वाजपेयी के बचपन की अनकही कहानियों का होगा विवरण्

लखनऊ। भारत के इतिहास में ऐसे कई प्रधानमंत्री रहे हैं, जो रूपांतरकारी नेता बनकर उभरे और जिन्होंने महान दूरदृष्टि और संकल्प के साथ महत्वपूर्ण पलों के माध्यम से देश को आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में ऐसे कई महत्वपूर्ण फैसले लिये गये, जिसने देश की नियति तय की और इसे वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई। इन नेताओं ने रणनैतिक दृष्टिकोण और निर्णायक कार्यों से इतिहास के पन्नों में अपना नाम अंकित किया और ऐसी अतुलनीय विरासत छोड़कर गये, जिसने अपार कामयाबी और प्रगति के एक युग को परिभाषित किया। स्वर्गीय अटल बिहार वाजपेयी ऐसे ही एक महत्वपूर्ण नेता थे।

अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रभावशाली नेता थे और भारतीयों के दिलों में उनके लिये अत्यधिक सम्मान है। एण्डटीवी अपने शो ‘अटल‘ के माध्यम से उनके बचपन के अनकहे पहलुओं को प्रस्तुत करने के लिये तैयार है। यूफोरिया प्रोडक्शन्स द्वारा निर्मित इस शो में एक ऐसे नेता के जीवन के आरंभिक वर्षों की कहानी दिखाई जायेगी, जिसने भारत की नियति को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत में ब्रिटिश शासन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस शो में अटल बिहारी वाजपेयी के बचपन की कहानियाँ दिखाई जायेंगी और उन घटनाओं, मान्यताओं एवं चुनौतियों पर प्रकाश डाला जायेगा, जिन्होंने उन्हें वह नेता बनाया, जो वे थे।

इस शो की कहानी में उनकी माँ के साथ उनके संबंध पर प्रकाश डाला जायेगा, जिन्होंने उनकी आस्थाओं, मूल्यों और चिन्तन पर गहरा प्रभाव डाला। एक ओर, भारत ब्रिटिश राज में गुलामी की वेदना सह रहा था और दूसरी ओर, संपत्ति, जाति और भेदभाव के विभाजन और आंतरिक कलह को भी झेल रहा था। अपनी माँ द्वारा परिकल्पित अखंड भारत का सपना एक ऐसा सपना था जिसे अटल ने बड़े जतन से अपने में सँजो लिया था। नेर कथानक अटल बिहारी बाजपेयी की प्रेरणादायी कहानी के पन्ने खोलती है, जो एक बालक के रूप में साधारण शुरुआत करके भारत के सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में एक बने।

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लोकसभा चुनाव में हार के बाद उत्तर प्रदेश में बढ़ी योगी आदित्यनाथ की मुश्किलें, नेतृत्व परिवर्तन की लगी अटकलें

नौकरशाही पर निरंकुश और अराजक होने का आरोप नया लुक ब्यूरो, नयी दिल्ली : लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में भाजपा को तगड़ा झटका लगने के बाद अब राज्य की सियासत गर्मा गई है। नतीजों के बाद भाजपा के अंदरखाने की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विरोध के सुर बुंलद हो गए है। योगी […]

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बिम्सटेक सम्मेलन: भारत का ‘पड़ोसी प्रथम’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर जोर

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कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन: बांग्लादेश का 5वें सदस्य के रूप में हुआ स्वागत

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