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संस्मरण-18 : महारास की कथा..स्वामी जी की वाणी

या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोय‌। ज्यों ज्यों डूबै श्यामरंग त्यों त्यों उज्ज्वल होय।। जैसे जैसे श्याम रंग मे यह मन डूबा जारहा है,त्यों त्यों उज्ज्वल होता जारहा.. मन की कालिमा धुलती जारही है। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते हैं,वे जल्दी छूटते नहीं। सदा वही भाव बना रहता है। बचपन मे सुना […]

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