
Aarohi Khandelwal: आज के दौर में जहां ज्यादातर बच्चे मोबाइल और टीवी पर अपना समय बिताते हैं, वहीं झारखंड के गुमला की 11 वर्षीय आरोही खंडेलवाल अपनी प्रतिभा से अलग पहचान बना रही हैं। महज 11 साल की उम्र में तीन किताबें लिखकर उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपनी रुचि का परिचय दिया है।
कला एवं संस्कृति में योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा, उन्हें ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ का प्रमाणपत्र भी मिला है। आरोही का सपना बड़ा होकर IAS अधिकारी बनने का है।
कौन हैं आरोही खंडेलवाल?
आरोही खंडेलवाल झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली हैं और DAV पब्लिक स्कूल, गुमला में छठी कक्षा की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में उन्होंने लेखन, कला और धार्मिक विषयों में अपनी रुचि से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 11 साल, सात माह और 17 दिन की उम्र में उन्हें कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियों को लेकर परिवार और स्थानीय स्तर पर भी उत्साह है।
चार साल की उम्र में सीख लिया था हनुमान चालीसा का पाठ
आरोही की रुचि बचपन से ही धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों में रही है। बताया जाता है कि उन्होंने महज चार साल की उम्र में हनुमान चालीसा का पाठ करना सीख लिया था। रामायण और धार्मिक कथाओं से जुड़ी उनकी दिलचस्पी ने आगे चलकर उनके लेखन को भी प्रेरित किया। वह धार्मिक प्रसंगों से सीख लेकर अपनी रचनाओं के माध्यम से दूसरों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश करती हैं।
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तीन किताबें लिखकर दिखाई अपनी प्रतिभा
आरोही ने अब तक तीन किताबें लिखी हैं। इनमें ‘दशावतार’, ‘गोकुल लीला’ और ‘हर कहानी एक शिक्षा’ शामिल हैं। इन पुस्तकों के जरिए उन्होंने धार्मिक प्रसंगों, कथाओं और उनसे मिलने वाली सीख को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। कम उम्र में लेखन के प्रति उनकी रुचि और रचनात्मकता उन्हें अन्य बच्चों से अलग बनाती है।
मां सीमा खंडेलवाल ने बढ़ाया हौसला
आरोही की सफलता के पीछे उनकी मां सीमा खंडेलवाल का महत्वपूर्ण योगदान बताया जाता है। उनकी मां उन्हें नई चीजें सीखने, अपनी प्रतिभा निखारने और लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। आरोही अब तक कई पुरस्कार और मेडल भी हासिल कर चुकी हैं। परिवार में उनके पुरस्कारों और उपलब्धियों को सहेजकर रखा गया है, जो उनकी मेहनत और रुचियों की कहानी बयां करते हैं।
पेंटिंग, डांस और गणित में भी है दिलचस्पी
आरोही की प्रतिभा केवल लेखन तक सीमित नहीं है। उन्हें पेंटिंग बनाना, डांस करना और गणित के कठिन सवाल हल करना भी पसंद है। वह अपना खाली समय मोबाइल देखने के बजाय ड्राइंग, लेखन और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में बिताना पसंद करती हैं। धार्मिक विषयों से जुड़ी प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने हिस्सा लिया है और उपलब्धियां हासिल की हैं।
IAS अधिकारी बनने का है सपना
आरोही का लक्ष्य भविष्य में IAS अधिकारी बनना है। वह अपने आसपास की समस्याओं को लेकर भी जागरूक रहती हैं। गुमला में ट्रैफिक जाम और फुटपाथ की कमी जैसी समस्याओं पर उनका ध्यान गया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने जिला प्रशासन से सकारात्मक कदम उठाने की मांग भी की है। महज 11 साल की उम्र में बड़े सपने देखने और अपनी रुचियों पर मेहनत करने वाली आरोही की कहानी बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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