
Lucknow: सिख धर्म के चौथे गुरु रामदास जी की जयंती शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम, कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु गुरु रामदास जी के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करते हुए मानव सेवा, विनम्रता और भाईचारे का संदेश अपना रहे हैं। गुरु रामदास जी का जन्म 1534 में हुआ था।
उनका जीवन सादगी, सेवा और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने समाज को जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के प्रति समान भाव रखने की प्रेरणा दी। उनकी शिक्षाओं में सेवा, सत्य, प्रेम और ईश्वर के प्रति समर्पण को विशेष महत्व दिया गया है। गुरु रामदास जी का नाम अमृतसर के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा है। उन्होंने उस स्थान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आगे चलकर सिख धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हु।
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जयंती के अवसर पर श्रद्धालु गुरुद्वारों में माथा टेककर गुरु साहिब का आशीर्वाद लेते हैं। जगह-जगह आयोजित लंगर में सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह परंपरा समानता और मानव सेवा का संदेश देती है। गुरु रामदास जी की जयंती हमें प्रेम, सेवा, विनम्रता और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह दिन सिख समुदाय और दुनिया भर के गुरुद्वारों में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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विशेष तौर पर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब) में इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और विशेष कीर्तन व लंगर का आयोजन किया जाता है। गुरु रामदास जी ने आनंद कारज रचना के साथ उन्होंने बाणी की रचना में 30 रागों में 638 शब्दों (शबदों) की रचना की, जिन्हें सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में शामिल किया गया है।
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