पितृदोष और ग्रह बाधा निवारण के लिए जपिए यह मंत्र

New Delhi

New Delhi: सनातन धार्मिक मान्यताओं में भगवान हनुमान को संकटमोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाला माना गया है। धार्मिक आस्था के अनुसार, हनुमान जी की नियमित उपासना से जीवन में आने वाली बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है। पितृदोष और ग्रह दोष से परेशान लोगों के लिए भी हनुमान जी की साधना को विशेष फलदायी बताया गया है।

 

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मान्यता है कि पितृदोष बाधा नाश के लिए हनुमान जी के मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है। इसके लिए हनुमान जी के विग्रह के सामने मदार की वर्तिका से चमेली के तेल का दीपक जलाने और मंत्र का 21 बार पाठ करने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक नियमित रूप से इस साधना को करने से पितृदोष और ग्रह दोष के प्रभाव कम हो सकते हैं। साथ ही जीवन में लंबे समय से रुके कार्यों के पूरा होने और परेशानियों से राहत मिलने की भी मान्यता है। हनुमान जी की पूजा में विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त इन दिनों हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना और मंत्र जाप करते हैं।

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इस पाठ का करें जाप

ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय वायु सुताय अञ्जनी गर्भ सम्भुताय अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत पालन तत्पराय धवली कृत जगत् त्रितयाया ज्वलदग्नि सूर्यकोटी समप्रभाय प्रकट पराक्रमाय आक्रान्त दिग् मण्डलाय यशोवितानाय यशोऽलंकृताय शोभिताननाय महा सामर्थ्याय महा तेज पुञ्ज: विराजमानाय श्रीराम भक्ति तत्पराय श्रिराम लक्ष्मणानन्द कारकाय कपिसैन्य प्राकाराय सुग्रीव सौख्य कारणाय सुग्रीव साहाय्य कारणाय ब्रह्मास्त्र ब्रह्म शक्ति ग्रसनाय लक्ष्मण शक्ति भेद निबारणाय शल्य लिशल्यौषधि समानयनाय बालोदित भानु मण्डल ग्रसनाय अक्षयकुमार छेदनाय वन रक्षाकर समूह विभञ्जनाय द्रोण पर्वतोत्पाटनाय स्वामि वचन सम्पादितार्जुन संयुग संग्रामाय गम्भिर शव्दोदयाय दक्षिणाशा मार्तण्डाय मेरूपर्वत पीठिकार्चनाय दावानल कालाग्नी रूद्राय समुद्र लङ्घनाय सीताऽऽश्वासनाय सीता रक्षकाय राक्षसी सङ्घ विदारणाय अशोकबन विदारणाय लङ्कापुरी दहनाय दश ग्रीव शिर:कृन्त्तकाय कुम्भकर्णादि वधकारणाय बालि निबर्हण कारणाय मेघनादहोम विध्वंसनाय इन्द्रजीत वध कारणाय सर्व शास्त्र पारङ्गताय सर्व ग्रह विनाशकाय सर्व ज्वर हराय सर्व भय निवारणाय सर्व कष्ट निवारणाय सर्वापत्ती निवारणाय सर्व दुष्टादि निबर्हणाय सर्व शत्रुच्छेदनाय भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी ध्वंसकाय सर्वकार्य साधकाय प्राणीमात्र रक्षकाय रामदुताय स्वाहा॥

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कैसे करें साधना?

1. सुबह या शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. हनुमान जी के विग्रह या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
3. धार्मिक मान्यता के अनुसार मदार की वर्तिका में चमेली का तेल इस्तेमाल करें।
4. श्रद्धा और एकाग्रता के साथ संबंधित हनुमान मंत्र का 21 बार जाप करें।
5. अंत में हनुमान जी से अपने कष्टों और बाधाओं के निवारण की प्रार्थना करें।

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