
अखिलेश ने राज्यसभा में तीसरा प्रत्याशी क्यों नहीं उतारा? 2027 पर बड़ा फोकस
Lucknow : उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर कई दिनों से जारी सियासी अटकलों पर अब विराम लग गया है। समाजवादी पार्टी ने आखिरकार तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। वहीं अंतिम दिन पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ संकेत दिया कि पार्टी की नजर अब राज्यसभा की तीसरी सीट पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर है।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद से ही सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज थीं। पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद कुछ अतिरिक्त वोट बचने की बात सामने आ रही थी। इसी वजह से माना जा रहा था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना सकती है। कुछ दिनों तक पार्टी की ओर से भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बनाए रखा गया। यहां तक कि पार्टी की ओर से तीसरे प्रत्याशी की संभावना के संकेत भी दिए गए थे।
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तीसरा उम्मीदवार उतरता तो बढ़ जाता मुकाबला
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक सपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारती तो चुनाव सीधे मुकाबले में बदल जाता। इसके लिए पार्टी को अपने अतिरिक्त वोटों के अलावा दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती। ऐसे में भाजपा और सपा दोनों खेमों में विधायकों को अपने पक्ष में करने की कोशिशें तेज हो सकती थीं।
सबसे बड़ा जोखिम क्रॉस वोटिंग का माना जा रहा था। यदि चुनावी गणित को साधने के लिए दूसरे दलों के विधायकों से समर्थन लेने की कोशिश होती तो दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो सकती थी। राजनीतिक विश्लेषण में यह भी माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता था।
2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर
अखिलेश यादव के तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा अध्यक्ष का यह कहना कि अब नजर तीन नहीं, बल्कि 403 पर है, पार्टी की प्राथमिकता का संकेत माना जा रहा है। यानी राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट के लिए जोखिम लेने के बजाय पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए अपने संगठन और विधायकों को एकजुट रखने पर जोर देना चाहती है।
सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना
सपा के तीसरे प्रत्याशी से पीछे हटने के बाद उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए अब 10 ही उम्मीदवार मैदान में हैं—भाजपा के आठ और सपा के दो। ऐसे में सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बन गई है और मतदान की जरूरत नहीं पड़ सकती।
सियासी नजरिए से देखें तो अखिलेश यादव का यह फैसला राज्यसभा की एक सीट के तत्काल मुकाबले से ज्यादा अगले बड़े चुनाव की तैयारी पर केंद्रित दिखाई देता है। तीसरे उम्मीदवार के जरिए राजनीतिक ताकत दिखाने के बजाय पार्टी ने फिलहाल अपने विधायकों को साथ रखने और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करने को प्राथमिकता दी है।
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