
IAF Chief Ashutosh Dixit: भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिल गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया चीफ नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह वायुसेना में डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लंबे सैन्य करियर और व्यापक उड़ान अनुभव वाले आशुतोष दीक्षित ने फाइटर पायलट के तौर पर कई महत्वपूर्ण विमानों को उड़ाया है। उनके पास करीब 3500 घंटे का उड़ान अनुभव बताया जाता है।
1986 में फाइटर स्ट्रीम से शुरू हुआ सफर
आशुतोष दीक्षित ने छह दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभालते हुए वायुसेना में लंबा अनुभव हासिल किया। वह एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। फाइटर पायलट के रूप में उन्होंने भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमानों पर काम किया है।
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मिराज-2000 से लेकर मिग-21 तक उड़ाए कई विमान
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों के संचालन का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर सहित 20 से अधिक प्रकार के फाइटर और अन्य विमानों को उड़ाया है। करीब 3500 घंटे की उड़ान का अनुभव उन्हें भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारियों में शामिल करता है। टेस्ट पायलट के तौर पर उनका अनुभव भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस भूमिका में विमान की तकनीकी क्षमताओं और उड़ान संबंधी पहलुओं का बारीकी से परीक्षण करना होता है।
देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से की पढ़ाई
आशुतोष दीक्षित ने अपने सैन्य प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के दौरान कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन किया। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला से प्रशिक्षण हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, बांग्लादेश और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली से भी शिक्षा प्राप्त की। इन संस्थानों में प्रशिक्षण और अध्ययन ने उनके सैन्य नेतृत्व तथा रणनीतिक समझ को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
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तीनों सेनाओं के साथ समन्वय का भी अनुभव
वायुसेना में अपने लंबे करियर के दौरान आशुतोष दीक्षित ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर काम किया है। इनमें हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में उनकी भूमिका भी शामिल रही है। इस दौरान उन्हें थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय से जुड़े विषयों पर काम करने का अवसर मिला। ऐसे अनुभव को मौजूदा समय में खास महत्व दिया जाता है, क्योंकि भारतीय रक्षा व्यवस्था में तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों और बेहतर तालमेल पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
डिप्टी चीफ से IAF Chief तक
IAF Chief बनने से पहले आशुतोष दीक्षित वायुसेना में डिप्टी चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस पद पर रहते हुए उन्हें संचालन, योजना और वायुसेना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी का अनुभव मिला।
अब भारतीय वायुसेना के प्रमुख के रूप में उनके सामने संगठन की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाए रखने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप वायुसेना की तैयारियों को आगे बढ़ाने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
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