
- खुद को मृतक दिखाकर बेटे को दिलाई सरकारी नौकरी और पत्नी को पेंशन
- 11 साल बाद उसी व्यक्ति के नाम जमीन का हुआ बैनामा! मिले दस्तावेजों से ब
- मृतक आश्रित नियुक्ति से लेकर 2013 के जमीन बैनामे तक जांच की मां
राकेश तिवारी
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी से सटे मोहनलालगंज की यह खबर आपको चौंकाने पर मजबूर कर देगी। पहले फर्जी दस्तावेज में शिक्षक ने खुद को मृत घोषित किया फिर अपने बेटे को अनुकम्पा नियुक्ति दिला दी। पत्नी पेंशन पाने लगी। लेकिन 13 साल बाद कथित रूप से मृत व्यक्ति जब बैनामा कराने पहुंचा तो परत-दर-परत सच्चाई निकलकर सामने आई। अब गोविंदपुर कोरोना के शिकायतकर्ता ललितेश सिंह पुत्र राम सुरेश ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। कथित मृतक का सम्बन्ध भी मोहनलालगंज तहसील के गोविंदपुर कोरोना गांव से है।
खबरों के मुताबिक सरकारी अभिलेखों में एक व्यक्ति को मृत घोषित कर उसके बेटे को मृतक आश्रित के रूप में सरकारी नौकरी दिलाने और पत्नी को पेंशन का लाभ दिलाने का आरोप सामने आया है। मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि शिकायतकर्ता के मुताबिक जिस व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में वर्ष 2002 में मृत घोषित किया गया, करीब 11 साल बाद वर्ष 2013 में उसी के नाम जमीन का बैनामा कराया गया।
शिकायतकर्ता ने विभागीय नियुक्ति आदेश, जमीन के बैनामे और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। सवाल यह है कि यदि श्रीराम यादव सरकारी रिकॉर्ड में वर्ष 2002 में मृत थे, तो वर्ष 2013 में उनके नाम जमीन का बैनामा किस आधार पर हुआ? बैनामे में दर्ज हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान वास्तविक हैं या नहीं, इसकी जांच से मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
ये भी पढें
28 जून 2002 को शिक्षक को मृत घोषित करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्नाव जिले के सोहरा थानांतर्गत मजरिया निवासी श्रीराम यादव पुत्र रघुवर यादव, जो पेशे से बेसिक विद्यालय के शिक्षक थे, को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर 28 जून 2002 को मृत घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद श्रीराम यादव के पुत्र राम बरन यादव को मृतक आश्रित के रूप में सरकारी नौकरी दिलाई गई। वहीं श्रीराम यादव की पत्नी को भी मृतक कर्मचारी की पत्नी के तौर पर पेंशन का लाभ मिल रहा है। शिकायत के साथ उपलब्ध दस्तावेजों में बेसिक शिक्षा विभाग उन्नाव ने संबंधित मृतक आश्रित नियुक्ति का आदेश भी सौंपा है। ललितेश के अनुसार विभाग की ओर से 30 जनवरी 2004 को मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी किया गया था। इस आदेश में नियुक्ति के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र और अभिलेख प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नियुक्ति के समय विभाग के समक्ष प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
11 साल बाद उसी व्यक्ति के नाम जमीन का बैनामा कैसे?
सबसे बड़ा सवाल वर्ष 2013 में हुए जमीन के बैनामे को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वर्ष 2002 में सरकारी अभिलेखों में श्रीराम यादव को मृत घोषित किए जाने के बावजूद वर्ष 2013 में उनके नाम जमीन का बैनामा कराया गया। शिकायत में उल्लेख है कि वर्ष 2013 में श्रीराम यादव के पुत्र देवेंद्र कुमार यादव द्वारा सुंदर लाल पुत्र स्वर्गीय राम जियावन की भूमि को श्रीराम यादव के नाम बैनामा कराया गया। यहीं से शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में कथित फर्जीवाड़े की आशंका जताई है।
ये भी पढें
शिकायतकर्ता ने फोरेंसिक जांच की मांग की
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2013 के बैनामा दस्तावेज पर दर्ज हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान की फोरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही श्रीराम यादव की मूल सेवा पुस्तिका और विभागीय अभिलेखों से रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु का रिकॉर्ड कब और किस आधार पर तैयार किया गया तथा बाद में उसके नाम जमीन का बैनामा कैसे हुआ।
RTI में विभाग से मांगी गई जानकारी
मामले में शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत भी संबंधित विभाग से जानकारी मांगी। उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक खंड शिक्षा अधिकारी, हिलौली, उन्नाव के कार्यालय से इस संबंध में लिखित सूचना उपलब्ध कराई गई है। दस्तावेज पर कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी, हिलौली, उन्नाव का उल्लेख है और पत्र की तारीख 14 अगस्त 2026 दर्ज है। इसमें मांगी गई सूचनाओं के संबंध में विभाग की ओर से जवाब और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख है।
ये भी पढें
उपमुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचा मामला, जांच शुरू
खबरों के मुताबिक जब शिकायतकर्ता ने मामले को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के संज्ञान में भी लाया, तब इस प्रकरण में कार्रवाई शुरू हुई। खबर लिखे जाने तक पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के स्तर पर भेजे जाने की बात शिकायतकर्ता ने कही है। बकौल ललितेश अब मामले की जांच मोहनलालगंज कोतवाली के हल्का दरोगा सोम सिंह को सौंपी गई है।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
पूरे प्रकरण में जांच के दौरान कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। जिसमें साल 2002 में श्रीराम यादव को मृत घोषित करने वाला रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार हुआ? मृतक आश्रित के रूप में राम बरन यादव की नियुक्ति किन दस्तावेजों के आधार पर हुई? श्रीराम यादव की पत्नी को पेंशन का लाभ किस आधार पर मिला? वर्ष 2013 में श्रीराम यादव के नाम जमीन का बैनामा कैसे कराया गया? बैनामे पर दर्ज हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान किसके हैं? क्या वर्ष 2013 के बैनामे और वर्ष 2002 के मृत्यु संबंधी सरकारी रिकॉर्ड में कोई विरोधाभास है? नियुक्ति के समय विभाग के सामने प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक थे या नहीं?
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
OTT Releases: OTT पर इस हफ्ते मनोरंजन की भरमार
संतान न होने पर श्राद्ध कौन करता है? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये नियम
‘लव एंड वॉर’ टीम ने रणबीर कपूर का जन्मदिन मनाया


2 thoughts on “चौंकिए मत! साल 2002 के मृत व्यक्ति ने 2013 में कराया जमीन बैनामा”
Comments are closed.