मायावती ने भतीजों को किया किनारे, अब भतीजी दीपिका को मिल सकता है मौका

Mayawati's decision

Mayawati’s decision: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को अब पार्टी में किसी तरह की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती ने यह भी साफ किया कि भविष्य में उनके बच्चों को भी पार्टी के राजनीतिक पदों पर लाने का कोई प्रस्ताव नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद के लिए पार्टी में जिम्मेदारी की संभावनाओं का रास्ता खुला रखा है।

आकाश-ईशान को नहीं मिलेगी राजनीतिक जिम्मेदारी

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दीपिका को मिल सकता है मौका

मायावती ने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को लेकर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में आनंद कुमार को परिवार के किसी सदस्य की मदद की आवश्यकता होती है, तो दीपिका उनकी सहायता कर सकती हैं। हालांकि पार्टी में उन्हें जिम्मेदारी देने का फैसला उनकी ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता को देखते हुए ही किया जाएगा।

दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने संकेत दिया है कि यदि वह आगे चलकर राजनीतिक जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार होती हैं और पार्टी के लिए उपयुक्त साबित होती हैं, तो उन्हें जरूरत के मुताबिक जिम्मेदारी दी जा सकती है।

दीपिका ने मना किया तो दूसरा विकल्प

मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दीपिका पार्टी की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार पार्टी की सहमति से दलित समाज के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। यानी बसपा में जिम्मेदारी का विकल्प केवल परिवार तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

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कांशीराम की विचारधारा का दिया हवाला

मायावती ने अपने फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम की परिवारवाद विरोधी विचारधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि वह कांशीराम की शिष्या होने के नाते पार्टी को परिवारवाद से दूर रखने के उनके विचारों पर कायम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ परिस्थितियों में उन्हें अपने छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा था। लेकिन अब परिवार के सदस्यों को राजनीतिक लाभ देने के बजाय संगठन को व्यापक सामाजिक आधार देने पर जोर रहेगा।

पार्टी को परिवारवाद से मुक्त रखने का दावा

मायावती ने कहा कि पार्टी संगठन में किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने के बाद उसके परिवार के अन्य सदस्यों को स्वतः राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। उनका लक्ष्य बसपा को परिवारवाद से मुक्त रखते हुए सर्वसमाज के लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ना है।

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