
Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है। नदी का पानी तेजी से घाटों और आसपास के निचले इलाकों में फैल रहा है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। वाराणसी के सभी 84 घाट पानी में डूब चुके हैं, जबकि कई निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। गंगा का जलस्तर करीब 69.40 मीटर दर्ज किया गया है। चेतावनी का स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
करीब चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी
अधिकारियों के मुताबिक गंगा का जलस्तर लगभग चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ रहा है। पानी बढ़ने के कारण घाटों पर कई प्रमुख स्थान जलमग्न हो गए हैं। नमो घाट पर स्थापित प्रसिद्ध ‘नमस्ते’ प्रतिमा भी पानी में काफी हद तक डूब गई है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। घाटों और नदी के आसपास लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है। भारी बारिश के बीच नदी से जुड़े कुछ सरकारी परिसरों में भी पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
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वरुणा नदी का बहाव भी प्रभावित
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई दे रहा है। जलस्तर बढ़ने से वरुणा का प्रवाह प्रभावित हुआ है और आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी पहुंचने लगा है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों ने सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाना शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।
61 राहत कैंप और 21 बाढ़ चौकियां तैयार
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए वाराणसी में 61 बाढ़ राहत कैंप चिह्नित किए गए हैं। इन कैंपों में लोगों के रहने, भोजन, पीने के पानी, साफ-सफाई, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इन चौकियों के जरिए जलस्तर और बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की जाएगी।
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198 नावें राहत कार्य के लिए तैयार
राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने करीब 198 नावों को तैयार रखा है। आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए NDRF, वॉटर पुलिस और PAC की टीमें भी स्टैंडबाय पर हैं। प्रशासन ने केवल लोगों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी इंतजाम किए हैं। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के चारे, पीने के पानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन की नजर जलस्तर पर
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की निगाह अब गंगा के अगले जलस्तर पर टिकी है। यदि पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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