

Nepal केदार घाटी में 2013 में जब लघु प्रलय उत्पन्न हुआ तो उसे केवल प्राकृतिक आपदा मान कर दुनिया आगे बढ़ गई। अब तिब्बत से लेकर नेपाल और उसके लपेटे में बिहार आया है तब भी इसको प्राकृतिक आपदा कहा जा रहा। यह नितांत झूठ है। यह मनुष्य की लोभी संस्कृति की ओर तेजी से बढ़ते कदमों का नतीजा है। इसको प्रकृति पर मत थोपिए। यह आपदा मनुष्य निर्मित है। हमने प्रकृति को प्रकृति रहने ही नहीं दिया है। बार बार हिमालय हमे चेतावनी दे रहा लेकिन हम सुधरने को तैयार नहीं। कथित विज्ञान, कथित तकनीक और कृत्रिम जीवन शैली की भोगी और विलासीय प्रवृत्ति अभी मनुष्य को और दंड देने वाली है। सुधर जाइए।
विज्ञान और प्रकृति शास्त्री इसे छठा महाविलोपन (Sixth Mass Extinction) कह रहे हैं। इस को वैज्ञानिक भाषा में होलोसीन विलोपन (Holocene Extinction) या एंथ्रोपोसीन विलोपन (Anthropocene Extinction) भी कहा जाता है। पृथ्वी पर पौधों और जीवों की प्रजातियों के बड़े पैमाने पर विलुप्त होने की एक चालू घटना है। पृथ्वी के इतिहास में पहले 5 बड़े महाविलोपन हो चुके हैं, जो ज्वालामुखी विस्फोट, हिमयुग और उल्कापिंडों के टकराने जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए थे। हालांकि, यह छठा महाविलोपन पिछले सभी विनाशों से पूरी तरह अलग है क्योंकि इसका मुख्य कारण कोई प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियां हैं। छठा महाविलोपन क्यों हो रहा है?
ये भी पढ़े
नेपाल में बाढ़ के बीच नई आफत, 72 घंटे में टूट सकती है बैरियर झील
इसके मुख्य कारण अंधाधुंध रासायनिक कृषि और शहरीकरण हैं। वैश्विक खाद्य उत्पादन के लिए 40% भूमि का उपयोग हो रहा है, जो 90% वनों की कटाई का कारण है। इसके चलते जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग बहुत बड़ा खतरा है। जीवाश्म ईंधनों (कोयला, तेल) के जलने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है। इससे मौसम चरम पर है। प्रकृति का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इंसानों द्वारा जंगली जीवों का अत्यधिक शिकार, अवैध व्यापार और ओवरफिशिंग (अत्यधिक मछली पकड़ना)। प्रदूषण चरम पर है। प्लास्टिक, कीटनाशकों और रासायनिक कचरे से महासागरों और भूमि का जहरीला होना खतरनाक है ।आक्रामक प्रजातियाँ बढ़ रही हैं। इंसानी गतिविधियों के कारण बाहरी प्रजातियों का नए पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश, जो स्थानीय जीवों को नष्ट कर रही हैं। स्थिति कितनी गंभीर है? वैज्ञानिक अध्ययनों और वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) के अनुसार, वर्तमान में प्रजातियों के विलुप्त होने की दर प्राकृतिक दर (Background Extinction Rate) से 100 से 1,000 गुना अधिक तेज है।स्तनधारियों, पक्षियों, सरीसृपों और विशेष रूप से उभयचरों (Amphibians) की आबादी दुनिया भर में बहुत तेजी से घट रही है।पृथ्वी के इतिहास में पहले हुए ‘क्रेटेशियस महाविलोपन’ (जिसमें डायनासोर खत्म हुए थे) की तुलना में आज रीढ़धारी जीवों (Vertebrates) के विलुप्त होने की गति 24 से 85 गुना तेज है।
पृथ्वी के पिछले 5 बड़े महाविलोपन
1. ऑर्डोविशियन-सिल्यूरियन, 44.3 करोड़ वर्ष पहलेहिमयुग और समुद्र के स्तर में भारी गिरावटलगभग 85% समुद्री प्रजातियाँ खत्म।
2. लेट डेवोनियन, 37.4 करोड़ वर्ष पहलेजलवायु परिवर्तन और महासागरों में ऑक्सीजन की कमीलगभग 75% प्रजातियाँ विलुप्त।
3. परमियन-ट्राइसिक (The Great Dying)25.2 करोड़ वर्ष पहलेबड़े ज्वालामुखी विस्फोट और अत्यधिक ग्लोबल वार्मिंगपृथ्वी के इतिहास का सबसे बड़ा विनाश, 95% से अधिक प्रजातियाँ समाप्त।
ये भी पढ़े
कालीन भैया से गुड्डू पंडित तक लौटे पुराने चेहरे, नए सितारों की भी एंट्री
4. ट्राइसिक-जुरासिक20.1 करोड़ वर्ष पहलेज्वालामुखी गतिविधि और महासागरीय अम्लीकरणलगभग 80% प्रजातियाँ खत्म, जिसके बाद डायनासोरों का प्रभुत्व बढ़ा।
5. क्रेटेशियस-पैलियोजीन, 6.6 करोड़ वर्ष पहलेविशाल उल्कापिंड (Asteroid) का पृथ्वी से टकरानाडायनासोरों सहित 76% प्रजातियाँ पूरी तरह नष्ट।
आगे का रास्ता बहुत कठिन है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस महाविलोपन को अभी भी रोका जा सकता है। इसके लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, कार्बन उत्सर्जन को कम करना, जैव-विविधता वाले क्षेत्रों (जैसे जंगलों और महासागरों) का संरक्षण करना और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
खबरों में अपडेट रहना हमारी आदत है और सबसे आगे रहना मेरा जुनून। अब नया लुक ऐप भी ले आया है। आप सभी से अनुरोध है कि आप इसे अपना प्यार, दुलार और आशीर्वाद दें। आप सभी से निवेदन है कि मेरा न्यूज ऐप अपने अपने फोन में इंस्टॉल कर लीजिए। मैं आप सभी का आभारी रहूंगा…। https://play।google।com/store/apps/details?id=com।app।nayalooknews
मानकनगर : नहर में मिले शवों की हुई शिनाख्त, पुलिस शराबी बता झाड़ा पल्ला
झारखंड में मांस बेचने के लिए अब NOC अनिवार्य
‘मिर्जापुर: द मूवी’ से पहले अली-दिव्येंदु की दावत
कोहली को सचिन से बेहतर बताने पर डिविलियर्स ने दी सफाई
मां ने घर के काम से रखा दूर, 14 घंटे पढ़कर बेटी बनीं डिप्टी कलेक्टर

