
The birthplace of Martyr Roshan Singh : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह की जन्मभूमि नवादा गांव लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता रहा। खासतौर पर खन्नौत नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में गांव और आसपास के इलाकों का संपर्क प्रभावित हो जाता था। ग्रामीणों के मुताबिक, इस समस्या का असर कई पीढ़ियों तक रहा। बाद में खन्नौत नदी पर पक्का पुल बनने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया।
ठाकुर रोशन सिंह का नाम काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े उन क्रांतिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। 19 दिसंबर 1892 को शाहजहांपुर के नवादा गांव में जन्मे रोशन सिंह युवावस्था में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और बाद में क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहे।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठाई थी आवाज
ठाकुर रोशन सिंह शुरुआत में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़े थे। बाद में उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ काम किया। 1922 में बरेली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान अंग्रेजी पुलिस की कार्रवाई के बीच उनके साहस की चर्चा हुई। इस मामले में उन्हें जेल की सजा भी भुगतनी पड़ी।
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इसके बाद वह क्रांतिकारी आंदोलन में और सक्रिय हो गए। दिसंबर 1924 में बमरौली की एक कार्रवाई से जुड़े मामले में भी उनका नाम सामने आया। बाद में काकोरी ट्रेन एक्शन के मुकदमे में भी उन्हें आरोपी बनाया गया।
काकोरी मामले में सुनाई गई फांसी की सजा
काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने कई क्रांतिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया। ठाकुर रोशन सिंह को भी इस मामले में दोषी ठहराया गया और फांसी की सजा सुनाई गई। 19 दिसंबर 1927 को प्रयागराज की नैनी जेल में ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई। उनके बलिदान ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक अमिट स्थान बनाया।

आजादी के बाद भी गांव को करना पड़ा इंतजार
देश को आजादी मिलने के बाद भी ठाकुर रोशन सिंह का पैतृक गांव कई वर्षों तक सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या से जूझता रहा। खन्नौत नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण बरसात में आवागमन मुश्किल हो जाता था।
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ग्रामीणों के अनुसार, बारिश और बाढ़ के दौरान कई महीनों तक आवागमन प्रभावित रहता था। इसका असर मरीजों के अस्पताल पहुंचने, बच्चों की पढ़ाई और किसानों की उपज को बाजार तक ले जाने पर भी पड़ता था।
पक्के पुल से आसान हुआ आवागमन
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से खन्नौत नदी पर पक्के पुल समेत कई विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके बाद पुल का निर्माण हुआ और क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर हुई। 30 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नवादा गांव पहुंचे और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से भी मुलाकात हुई।
ग्रामीणों के लिए लाइफलाइन बना पुल
पक्का पुल बनने के बाद नवादा और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में राहत मिली है। अब मरीजों को अस्पताल पहुंचाना आसान हुआ है, छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज तक पहुंच बेहतर हुई है और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में सुविधा मिलती है।
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