
कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
Mahana’s emotional statement: राज्य विधानसभा में बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन की कार्यवाही के दौरान भावुक हो उठे। मंगलवार को सदन में हुए हंगामे पर नाराजगी और पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा, मेरे राजनीतिक जीवन का यह अंतिम चरण है। अब मुझे गंभीरता से सोचना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी के योग्य हूं भी या नहीं। मेरे मन में पीड़ा है। पहली बार लगा कि या तो हमारे प्रयास में कहीं कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर की यह बात सही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में होती है।
महाना ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से सदन को गरिमा और संवाद के साथ चलाने का प्रयास किया, लेकिन हाल की घटनाओं के बाद आत्ममंथन करने की जरूरत महसूस हो रही है। मैं सोचूंगा कि जो कुछ मैंने किया वह उचित था या नहीं। जल्द ही इस संबंध में निर्णय लूंगा। यूपी विधानसभा में लगातार हंगामा होता रहा। इस बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के ही पास हो गए। इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की मांग की जिस पर सभापति ने सहमति दे दी।
केशव बोले- सपा ने लोकतांत्रिक परंपराएं तोड़ीं
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी एक ऐसी सियासी पार्टी है जिसने कभी भी लोकतांत्रिक परंपराओं या व्यवस्थाओं का सम्मान नहीं किया। कल विधानसभा के अंदर पार्टी ने जिस तरह का व्यवहार किया, वह अति निंदनीय है। सपा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बोलने का अवसर तक नहीं दिया। इससे पता चलता है कि उनका मकसद सिर्फ सदन का समय बर्बाद करना है। उन्हें जनता की कोई परवाह नहीं है। जो लोग बाबर या बाबरी मस्जिद का समर्थन करते हैं, उन्हें श्री राम जन्मभूमि से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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चाहे वह चढ़ावे, दान या मंदिर के निर्माण से जुड़ा मामला हो। समाजवादी पार्टी को 2027 में भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और उसका पूरी तरह से खत्म होना तय है। विधानसभा में मंगलवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। शोर शराबे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक्तव्य दिया। सपा विधायक सचिन यादव को निलंबित कर दिया गया। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
निलंबन के बाद धरने पर बैठे सचिन
विधानसभा से निलंबन के बाद सचिन यादव बाहर निकले। वह चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद वहां अन्य विधायक भी आ गए। विधायकों ने आरोप लगाया कि वे चंदा चोरी के मसले पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन सरकार इस मुददे पर बोलने को तैयार नहीं है।
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