कैलाश की तरह पूजे जाते हैं नंदीराज

Bailadila's Nandiraj

3968.8 फुट ऊँचा है बैलाडीला का यह शिखर

आसाम में भी यहां आते हैं कोया समाज के प्रकृति उपासक

हेमंत कश्यप

Bailadila’s Nandiraj : प्रकृति पूजा का संदेश द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने मानव समाज को दिया था। तब से लोग नदी-पहाड़ों की पूजा करते आ रहे हैं। इस संदेश का परिपालन हजारों साल से बस्तर का आदिवासी समाज आज भी कर रहा है। पांच राज्यों में बसे कोया समाज के लाखों लोग बैलाडिला पहाड़ के शिखर नंदराज को अपने आराध्य लिंगों अर्थात महादेव के वाहन नंदी का डिल मानते हैं और हजारों वर्षों से इसकी उपासना करते आ रहे हैं।

ये भी पढें

उत्तर प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र कल तक स्थगित

बैलाडीला विश्व स्तरीय लौह अयस्क से परिपूर्ण 24 पर्वत श्रंखला है। यह समुद्र की सतह से 1210 मीटर अर्थात 3968.8 फुट ऊँचा है। यह पर्वत संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से 135 किमी दूर स्थित है। इसका आकार बैल के डील के समान होने के कारण इसे बैलाडीला कहा जाता है। बैलाडीला की सबसे ऊँची चोटी नंदीराज के नाम से प्रसिद्ध है। किनारे-किनारे रुद्राक्ष और बेंत का जंगल हुआ करता था। बैलाडीला पर्वत की कई शाखाएं हैं, जो 25 किमी तक फैली हैं।

WhatsApp Image 2026 08 03 at 3.04.10 PM (1)
बैलाडीला का पवित्र नंदीराज शिखर

कोया समाज के हैं देव

कोया आदिवासी समाज के लोग छत्तीसगढ़ के अलावा सीमावर्ती ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में निवासरत हैं। इस समाज के 100 लोगों की बस्ती दूरस्थ आसाम में भी है। कोया समाज प्रकृति उपासक है। बैलाडीला के शिखर को कोया समाज नंदराज कहता है और अपना आराध्य मानते हुए नंदराज बाबा कह संबोधित करते हैं। बैलाडीला की दूसरी चोटी का नाम पितुररानी है। जिसे कोया समाज नंदराज बाबा की पत्नी के नाम से पूजता है।

ये भी पढें

लोकसभा में विदेश मंत्रालयः पड़ोसियों संग मजबूत हुआ डिजिटल भुगतान

 

हर साल तीन दिवसीय मेला

यहां प्रतिवर्ष अप्रैल महीने में तीन दिवसीय वार्षिक जात्रा आयोजित किया जाता है। इस मौके पर आसपास के 15 गांवों के हजारों आदिवासी यहां पहुंचते हैं। बैल को किसानों का मित्र माना जाता है और पहाड़ के नीचे कोया समाज हजारों वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा है। इस पहाड़ की आकृति किसानों के मित्र बैल के पीठ की तरह है इसलिए भी इसके शिखर को नंदराज या नंदीराज के रूप में पूजने की परंपरा सदियों से जारी है।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

ये भी पढें

उत्तर प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र कल तक स्थगित

जमशेदपुर FC पर सुनील छेत्री की अपील, टाटा समूह से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

डोकलाम के पास 17 km नई रेलवे लाइन, बॉर्डर कनेक्टिविटी होगी मजबूत

दिल्ली के नौ स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

 

 

 

2 thoughts on “कैलाश की तरह पूजे जाते हैं नंदीराज”

Comments are closed.

Madhya Pradesh Religion

मध्य प्रदेश का अनोखा मंदिर, जहां दिवाली के बाद प्रसाद में बांटे जाते हैं रुपये और सिक्के

Madhya Pradesh: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी की आराधना और सुख-समृद्धि की कामना का पर्व है। इस दिन देशभर के मंदिरों और घरों में मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां दिवाली के बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में मिठाई या फल नहीं, […]

Read More
Religion Uttar Pradesh

श्री काशी विश्वनाथ धाम में जुटे देश-विदेश के 50 चित्रकार

अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का भव्य शुभारंभ पद्मश्री हस्तियों की मौजूदगी में प्रदर्शनी का उद्घाटन Varanasi: धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति की प्राचीन नगरी काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर स्थित ललिता घाट पर शनिवार को अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। गंगा महासभा एवं ललित कला अकादमी के संयुक्त […]

Read More
Maharishi Valmiki Jayanti
homeslider Religion

महर्षि वाल्मीकि जयंती कल: रत्नाकर से आदिकवि बनने की प्रेरक कहानी

Maharishi Valmiki Jayanti: महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशभर में आदि कवि महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धापूर्वक याद किया जाता है। संस्कृत साहित्य के महान रचनाकार और रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जीवन सत्य, तपस्या, ज्ञान और आत्मपरिवर्तन का संदेश देता है। उनकी जीवनगाथा बताती है कि मनुष्य अपने विचारों और कर्मों में बदलाव […]

Read More