‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पर फिलहाल विराम, मॉनसून सत्र में नहीं होगा पेश; JPC का कार्यकाल बढ़ा

Parliament News : संसद के मानसून सत्र के बीच केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब यह विधेयक मौजूदा मानसून सत्र में पेश नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही इस बिल की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का कार्यकाल भी बढ़ा दिया गया है।

JPC को शीतकालीन सत्र तक रिपोर्ट सौंपने का समय

सरकार ने जेपीसी को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अब समिति को संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। ऐसे में साफ है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

मॉनसून सत्र में नहीं होगी चर्चा

संसद के मौजूदा सत्र को लेकर उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश करेगी। लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस सत्र में न तो विधेयक पेश होगा और न ही इस पर चर्चा होगी।

EAC-PM की रिपोर्ट में बताए गए थे बड़े फायदे

मार्च 2026 में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यदि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो इससे सरकारी खर्च में बड़ी बचत होगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। रिपोर्ट के अनुसार, एक साथ चुनाव होने पर अगले पांच वर्षों में चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले कर्मचारियों की संख्या में करीब 26 लाख (लगभग 28 प्रतिशत) की कमी आ सकती है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में लगने वाले करीब 1.04 करोड़ कार्य दिवसों की भी बचत होने का अनुमान है।

शिक्षा व्यवस्था को भी होगा फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव ड्यूटी में बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती होती है और अधिकांश मतदान केंद्र स्कूलों में बनाए जाते हैं। यदि बार-बार चुनाव नहीं होंगे, तो शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी में कम लगना पड़ेगा, जिससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित नहीं होगी और विद्यार्थियों की शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर

निर्वाचन आयोग का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने के लिए शुरुआती स्तर पर बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की जरूरत होगी। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में बार-बार चुनाव कराने के लिए सुरक्षा बलों की लगातार तैनाती की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे लंबे समय में प्रशासनिक बोझ घट सकता है। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर बहस जारी है।


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