
Adani Group : भारतीय विमानन क्षेत्र में अपनी एयरलाइन शुरू करने की अटकलों पर आखिरकार अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को भेजी गई नियामकीय फाइलिंग में कहा है कि फिलहाल कमर्शियल एयरलाइन कारोबार में उतरने की उसकी कोई योजना नहीं है। कंपनी ने हालिया मीडिया रिपोर्टों और बाजार में चल रही चर्चाओं को भ्रामक, निराधार और तथ्यहीन बताते हुए उनका खंडन किया है।
‘एयरलाइन शुरू करने की खबरें पूरी तरह गलत’
अडानी एंटरप्राइजेज ने अपने बयान में कहा कि समूह द्वारा एयरलाइन सेवा शुरू करने संबंधी हालिया खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि न तो इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है और न ही समूह विमान संचालन के व्यवसाय में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है। इस स्पष्टीकरण के साथ कंपनी ने बाजार में चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है।
राहुल भाटिया के बयान के बाद तेज हुई थीं चर्चाएं
अडानी समूह का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइन कंपनियों के बीच संभावित हितों के टकराव को लेकर बहस तेज हो गई थी।
हाल ही में इंडिगो के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा था कि यदि एयरपोर्ट संचालक कंपनियों को अपनी एयरलाइन चलाने की अनुमति मिलती है, तो इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और हितों का टकराव पैदा हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया, लेकिन बाजार में इसे अडानी समूह से जोड़कर देखा जा रहा था।
देश के आठ बड़े एयरपोर्ट का संचालन करता है अडानी समूह
अडानी समूह अपनी सहायक कंपनी अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स के माध्यम से देश के आठ प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है। ऐसे में एयरलाइन कारोबार में संभावित एंट्री की खबरों ने विमानन उद्योग में नई प्रतिस्पर्धा की अटकलों को जन्म दिया था। हालांकि कंपनी के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समूह का फोकस फिलहाल केवल एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर है।
भारत का एविएशन बाजार तेजी से बढ़ रहा
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। मौजूदा समय में इंडिगो करीब 65.4 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी एयरलाइन है, जबकि टाटा समूह की एयर इंडिया लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐसे में यदि कोई नया बड़ा औद्योगिक समूह इस क्षेत्र में उतरता, तो प्रतिस्पर्धा के समीकरण बदल सकते थे।
सरकार का लक्ष्य- 2047 तक 350-400 एयरपोर्ट
केंद्र सरकार बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को देखते हुए देश के एयरपोर्ट नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश में 350 से 400 हवाई अड्डे विकसित करना है। वर्ष 2014 में देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, जिनकी संख्या अब तेजी से बढ़ रही है। कंपनी के ताजा स्पष्टीकरण से साफ हो गया है कि अडानी समूह की प्राथमिकता फिलहाल एयरलाइन संचालन नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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