23 साल बाद इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला, तीन दोषी करार; सात जुलाई को सजा का ऐलान

Indradev Singh Murder Case

Indradev Singh Murder Case :  लखनऊ के बहुचर्चित वरिष्ठ अधिवक्ता और लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में करीब 23 वर्ष बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) मामलों की विशेष अदालत ने इस मामले में तीन आरोपितों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया है। अब दोषियों की सजा पर  सात जुलाई को सुनवाई होगी। इस फैसले के साथ लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार और अधिवक्ता समुदाय को बड़ी राहत मिली है।

यह चर्चित हत्याकांड आठ अगस्त 2002 को हुआ था। उस दिन इंद्रदेव सिंह अपने कैसरबाग स्थित चैंबर से स्कूटर पर महानगर स्थित आवास के लिए निकले थे। रास्ते में एक युवक ने उनसे लिफ्ट मांगी। जैसे ही स्कूटर कुछ दूरी आगे बढ़ा, युवक ने पीछे से उनकी कनपटी पर गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।

 CBI जांच ने खोले राज, अदालत ने तीन आरोपितों को ठहराया दोषी

घटना के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कई घंटों तक विरोध-प्रदर्शन चलता रहा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती करनी पड़ी। वकीलों के दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई, लेकिन बाद में इसे सीबीआई के हवाले कर दिया गया।

CBI की जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आए। विवेचना में हत्या की साजिश, शूटरों की भूमिका और अन्य आरोपितों के संबंध में साक्ष्य जुटाए गए। एजेंसी ने वर्ष 2004 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। लंबे समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-B के तहत दोषी करार दिया। मामले के अन्य आरोपितों की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।

संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह, 23 साल बाद परिवार को मिला न्याय

जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि हत्या के पीछे एक विवादित संपत्ति को लेकर चल रहा पुराना विवाद प्रमुख कारण था। इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा सिंह, जो उस समय पीसीएस अधिकारी थीं, ने इस मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान कई प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आए, जिसके कारण यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

अदालत के फैसले के बाद इंद्रदेव सिंह के परिवार ने संतोष व्यक्त किया है। परिजनों का कहना है कि वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष करने के बाद आखिरकार अदालत का निर्णय उनके विश्वास को मजबूत करता है। उन्होंने सीबीआई की जांच और अभियोजन पक्ष की पैरवी की भी सराहना की। गौरतलब है कि इंद्रदेव सिंह की पुत्री लक्ष्मी सिंह वर्तमान में नोएडा की पुलिस आयुक्त हैं, जबकि उनके दामाद राजेश्वर सिंह लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। अब पूरे मामले में सभी की नजर सात जुलाई पर टिकी है, जब अदालत दोषियों की सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी।

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