
Vaibhav Suryavanshi भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार बल्लेबाजी ने पिछले कुछ समय में क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने उन्हें देश के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। अब उनके बचपन के कोच ने उनकी सफलता के पीछे छिपे संघर्ष, अनुशासन और परिवार के त्याग की कहानी का खुलासा किया है।
रोजाना 100 ओवर तक करते थे बल्लेबाजी अभ्यास
वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने बताया कि छोटी उम्र से ही वैभव का अभ्यास बेहद कठोर रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि 10 साल की उम्र से वैभव रोजाना करीब 100 ओवर तक बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे। कोच के मुताबिक, वह हर दिन लगभग 600 से अधिक गेंदों का सामना करते थे। अभ्यास सुबह साढ़े सात बजे शुरू होकर शाम चार बजे तक चलता था। शुरुआत में मनीष ओझा खुद घंटों थ्रोडाउन देते थे, फिर सहायक कोच और बाद में अकादमी के गेंदबाज इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे।
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8 घंटे की मेहनत ने बनाया खास बल्लेबाज
ओझा का कहना है कि लगातार छह वर्षों तक एक ही तकनीक और शॉट्स को दोहराने से वैभव की “मसल मेमोरी” बेहद मजबूत हो गई। यही वजह है कि आज उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास, टाइमिंग और पावर साफ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि नेट प्रैक्टिस, थ्रोडाउन और बॉलिंग मशीन के जरिए वैभव ने अपने खेल को निखारा। लगातार अभ्यास और सही तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
मां का त्याग सुनकर भावुक हो जाएंगे
वैभव की सफलता में उनके माता-पिता की भूमिका भी बेहद अहम रही। कोच ने बताया कि वैभव की मां आरती रोज रात करीब 2 बजे उठ जाती थीं और 10 से 15 लोगों के लिए खाना तैयार करती थीं। यह खाना केवल वैभव और उनके पिता के लिए ही नहीं, बल्कि ड्राइवर, गेंदबाजों और कई अन्य बच्चों के लिए भी होता था। कई बार जिन खिलाड़ियों के पास अपना खाना नहीं होता था, वे भी उसी भोजन में शामिल हो जाते थे।
हर दिन समस्तीपुर से पटना का सफर
कोच ने याद करते हुए बताया कि जब वैभव पहली बार आठ साल की उम्र में उनकी अकादमी पहुंचे थे, तब वह बिहार के समस्तीपुर से पटना तक ढाई घंटे का सफर तय करके आते थे। यह सफर रोजाना करना किसी छोटे बच्चे के लिए आसान नहीं था। मनीष ओझा ने कहा कि उस समय वह कोई बड़े नाम वाले कोच नहीं थे, लेकिन वैभव के पिता ने उन पर भरोसा जताया। यही भरोसा और परिवार का समर्पण आज सफलता की कहानी बन गया है।
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आज लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा बने वैभव
कोच का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी केवल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि मेहनत और अनुशासन की मिसाल हैं। उनकी सफलता के बाद अब बड़ी संख्या में अभिभावक अपने छोटे बच्चों को क्रिकेट अकादमियों में लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैभव आज देशभर के युवा खिलाड़ियों और उनके माता-पिता के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा के साथ लगातार मेहनत, सही मार्गदर्शन और परिवार का समर्थन हो तो कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।
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