
Trump अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीने से जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने की दिशा में बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रविवार को दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस पर अंतिम मंजूरी नहीं दी है, जिससे समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान ने नहीं लिया अंतिम फैसला
ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान अभी भी प्रस्तावित समझौते की शर्तों की समीक्षा कर रहा है। वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान ने न तो किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं और न ही कोई आधिकारिक घोषणा की है। ऐसे में ट्रंप के दावे के बावजूद समझौते पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है।
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तेहरान पहुंचे कतरी मध्यस्थ
सूत्रों के मुताबिक, कतर के वरिष्ठ वार्ताकार रविवार सुबह तेहरान पहुंच गए हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत को अंतिम रूप देना है। माना जा रहा है कि कतर इस पूरे समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप का बड़ा दावा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता 14 जून को ही हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को सभी देशों के लिए फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे को लेकर सावधानी बरती जा रही है।
ईरान ने कहा- तारीख तय नहीं
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि समझौते पर हस्ताक्षर की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया रविवार को पूरी नहीं होगी, लेकिन आने वाले दिनों में समझौते की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता।
कट्टरपंथियों का विरोध बढ़ा
समझौते को लेकर ईरान के भीतर भी मतभेद सामने आ रहे हैं। उत्तर-पूर्वी शहर Mashhad में विदेश मंत्रालय के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने ईरानी वार्ताकारों और विदेश मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। कट्टरपंथी समूहों का आरोप है कि प्रस्तावित समझौता ईरान के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। उनका मानना है कि इससे हरमुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ कमजोर होगी और अमेरिका को ज्यादा रियायतें मिल जाएंगी।
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साइबर हमले से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित
इसी बीच ईरान के चार बड़े बैंकों की सेवाएं साइबर हमले के कारण प्रभावित हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, बैंकिंग नेटवर्क के साझा संचार ढांचे को निशाना बनाया गया था। हालांकि, प्रशासन ने दावा किया है कि किसी ग्राहक का डेटा लीक नहीं हुआ और तकनीकी टीमों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है।
कहां फंसा है पेच?
विश्लेषकों के अनुसार समझौते में सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा गारंटी, क्षेत्रीय प्रभाव और हरमुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक स्थिति को लेकर है। अमेरिका जल्द समझौता चाहता है, जबकि ईरान घरेलू राजनीतिक दबाव और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए हर पहलू की सावधानी से समीक्षा कर रहा है। फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। यदि यह समझौता होता है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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