ट्रंप के तेवर और मोदी की चेतावनी! क्या दुनिया पर मंडरा रहा है तेल संकट का सबसे बड़ा खतरा?

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवर हैं, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने, ईंधन की खपत कम करने और सोना खरीदने से बचने की अपील ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब चर्चा तेज हो गई है कि क्या दुनिया एक बड़े तेल संकट की ओर बढ़ रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने लोगों से कुछ समय तक सोना खरीदने से बचने और विदेशी मुद्रा बचाने की बात भी कही। पीएम मोदी ने कहा  कि जिस तरह देश ने कोविड-19 संकट का सामना एकजुट होकर किया था, उसी तरह इस चुनौती से भी पार पाया जा सकता है। हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे खर्चीले आयोजनों से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की भी सलाह दी। इतना ही नहीं, स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाओं का सुझाव देकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिन सामान्य नहीं हो सकते।

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ट्रंप ने युद्धविराम को बताया ‘बेहद कमजोर’

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष विराम को “बेहद कमजोर और नाजुक” बताया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की तरफ से आया प्रस्ताव “पूरी तरह अस्वीकार्य” है और अमेरिका किसी भी दबाव में नहीं आने वाला। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हमें पूरी जीत चाहिए। कोई दबाव नहीं है। इसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन के भीतर भी दो राय सामने आ रही हैं। कुछ अधिकारी ईरान पर आक्रामक कार्रवाई के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। माना जा रहा है कि अगर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा संकट

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिखाई दे रहा है। यह दुनिया के लिए तेल सप्लाई का सबसे अहम समुद्री रास्ता माना जाता है। युद्ध शुरू होने के बाद यहां तेल परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जानकारों के मुताबिक, युद्ध से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल दुनिया भर में पहुंचता था। लेकिन अब आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है।

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अरामको ने दी चेतावनी

सऊदी अरब की ऊर्जा कंपनी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य नहीं हुई, तो वैश्विक तेल बाजार 2027 तक संकट में रह सकता है। उन्होंने कहा कि जितनी लंबी अवधि तक सप्लाई बाधित रहेगी, तेल बाजार को सामान्य होने में उतना ही ज्यादा समय लगेगा। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। वहीं, LNG की आधी जरूरत भी विदेशों से पूरी होती है। इसमें से बड़ा हिस्सा होर्मुज जलमार्ग के जरिए भारत पहुंचता है। ऐसे में पश्चिम एशिया का तनाव भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है।

सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार ने फिलहाल घबराने की जरूरत से इनकार किया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता है और राशनिंग लागू करने की कोई योजना नहीं है।

  • भारत के पास लगभग 60 दिन का ईंधन भंडार मौजूद है,
  • करीब 45 दिन का LPG स्टॉक सुरक्षित रखा गया है,
  • अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो की व्यवस्था की जा रही है,

क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है और होर्मुज जलमार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका असर महंगाई, परिवहन और आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ेगा।

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