देश के प्रधान सेवक को एक आम भारतीय का खुला पत्र

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माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम।

आज जब मैं यह पत्र लिख रहा हूँ, मन में एक अजीब सी बेचैनी है… एक चिंता है, जो सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की है। जो इस देश से प्रेम करता है, वो एक बार फिर आपकी ओर निहार रहे हैं। दुनिया एक बार फिर युद्ध की भयावह छाया में खड़ी है। ऊर्जा के रास्तों पर हमले हो रहे हैं। समुद्रों में आग की लपटें तैर रही है। क्रूज़ धू-धू कर जल रहे हैं और दुनिया भर में पेट्रोल-डीज़ल और घरेलू गैस के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। ऐसे कठिन समय में, देश की नज़रें फिर से आपकी ओर उठ रही हैं। उसी विश्वास के साथ, जो कोरोना काल में आपने कर दिखाया था। जब पूरा देश ठहर गया था, तब आपने ही हमें संभाला था। आपके वो शब्द आदेश नहीं थे। आपने हौसला दिया था। आपने 140 करोड़ लोगों के दिलों में भरोसा जगाया था कि हम मिलकर हर संकट से निकल सकते हैं।

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प्रधानमंत्री जी, आज फिर वही समय आ गया है। एक बार फिर देश को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है। आपसे विनम्र निवेदन है कि एक बार फिर मोर्चा संभालिए। जरूरी दफ्तर चलें, लेकिन जहां संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा दिया जाए। कोरोना के समय हम सबने साबित किया था कि भारत का नागरिक अनुशासन और जिम्मेदारी दोनों निभा सकता है। आज भी वही भावना जीवित है, ‘नेशन फर्स्ट’ यह शब्द हमारे लिए कोई नारा नहीं, जीवन का सिद्धांत है। अगर आप एक बार कह दें, तो लोग खुद ही अपने कदम रोक लेंगे। सड़कों पर गाड़ियां कम हो जाएंगी, लोग सार्वजनिक परिवहन अपनाएंगे। आपके एक अनुरोध पर अनावश्यक यात्राएं बंद हो जाएंगी। इस बार भी लोग अपने घरों में रहकर देश की सेवा करेंगे। बिना किसी शिकायत के, बिना किसी मजबूरी के, सिर्फ और सिर्फ देश के लिए।

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प्रधानमंत्री जी, बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। हमने यह भी सीख लिया है। अगर इससे देश की ऊर्जा बचती है, तो कोई भी माता-पिता पीछे नहीं हटेगा। बच्चे भी समझते हैं कि देश पहले है, बाकी सब बाद में। हमारे देश के स्कूलों में अब वो सुविधाएं हो गई हैं, जिससे लोग ऑनलाइन अच्छी से अच्छी शिक्षा दे सकते हैं। कोचिंग सेंटर सब ऑनलाइन हो सकते हैं। यहां से ऊर्जा का अच्छा खासा बचत हो सकता है। अगर आप कह दें तो यह देश अपने जीवन में भी संयम ला सकता है। तीन समय की जगह दो समय भोजन कर सकता है। सादगी अपना सकता है। भारत ने हमेशा कठिन समय में ‘कम में भी संतोष’ का रास्ता चुना है। चना-चबैना खाकर भी यह देश मुस्कुराता रहा है और आगे भी मुस्कुराएगा, अगर बात देश की हो।

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हम सब जानते हैं कि दुनिया के कई देश आज युद्ध और अस्थिरता में डूबे हुए हैं। लेकिन भारत… भारत आज भी शांति, विश्वास और स्थिरता का प्रतीक है। यह आपके नेतृत्व का ही परिणाम है कि इस उथल-पुथल भरी दुनिया में हमारा देश एक सुरक्षित आश्रय बना हुआ है। एक और विनम्र निवेदन है ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, जैसे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से गैस उत्पादन, पर भी तेज़ी से काम हो। अगर प्रशासनिक बाधाएं दूर हों, तो यह देश आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत कदम बढ़ा सकता है।
प्रधानमंत्री जी, यह देश आपको सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि अपने “प्रधान सेवक” के रूप में देखता है। हमें भरोसा है। अटूट भरोसा। विश्वास है कि आपके एक आह्वान पर 140 करोड़ लोग फिर से एकजुट हो जाएंगे। बस एक बार…आप देश से कह दीजिए। फिर देखिए, यह भारत है, यह सब कुछ सह लेगा, सब कुछ बदल देगा…और हर संकट को अवसर में बदल देगा। आपके नेतृत्व में, हमें विश्वास है, भारत हर कठिनाई से उबर जाएगा।

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सादर,
एक चिंतित लेकिन आशावान भारतीय

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भौमेंद्र शुक्ल
भौमेंद्र शुक्ल

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