मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के बीच अमेरिका ने एक अहम फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने समुद्र में ट्रांजिट के दौरान फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए कुछ देशों को अस्थायी अनुमति देने की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। खासतौर पर ईरान से जुड़े तनाव और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिम के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस संबंध संयुक्त राज्य अमेरिका का राजकोष विभाग मेंने जानकारी दी कि सीमित समय के लिए एक विशेष लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके तहत समुद्र में पहले से ट्रांजिट में मौजूद कुछ रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई को बनाए रखना और कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोकना है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
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इससे पहले अमेरिका ने भारत को भी सीमित समय के लिए रूसी तेल खरीदने की छूट दी थी। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे कई देशों के लिए रूसी तेल का आयात मुश्किल हो गया था। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने कुछ शर्तों के साथ यह अस्थायी राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। उनके अनुसार यह अनुमति केवल उस तेल पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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