रवि प्रदोष व्रत आज: शिव कृपा पाने का शुभ संयोग, जानिए पूजा मुहूर्त, विधि और व्रत के विशेष लाभ

राजेन्द्र गुप्ता

सनातन परंपरा में कुछ व्रत ऐसे माने जाते हैं, जो सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का मजबूत आधार होते हैं। इन्हीं में से एक है प्रदोष व्रत। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा से रखने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। हर महीने दो बार आने वाला यह व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का खास महत्व होता है। फाल्गुन महीना अब विदाई की ओर है और इसी महीने का आखिरी प्रदोष व्रत मार्च में पड़ रहा है, जिसे बेहद फलदायी माना जा रहा है।

कब रखा जाएगा व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार इस समय शुक्ल पक्ष चल रहा है। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी की रात 8:05 बजे से हो रही है और इसका समापन 1 मार्च की शाम 6:30 बजे तक रहेगा। ऐसे में फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 1 मार्च को रखा जाएगा। जो भक्त इस दिन व्रत और पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए यह तिथि बेहद शुभ मानी जा रही है।

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इस बार कौन सा प्रदोष?

यह प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। प्रदोष व्रत का नाम हमेशा उस वार के अनुसार रखा जाता है, जिस दिन यह पड़ता है। जैसे अगर यह शुक्रवार को हो तो शुक्र प्रदोष और सोमवार को हो तो सोम प्रदोष कहलाता है। रवि प्रदोष व्रत को सूर्य देव और भगवान शिव दोनों की कृपा पाने का विशेष दिन माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी की रात 8:05 बजे से शुरू होकर 1 मार्च की शाम 6:30 बजे तक रहेगी। 1 मार्च को सुबह 7:40 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक पूजा के लिए शुभ समय रहेगा। वहीं प्रदोष काल की पूजा के लिए शाम 5:51 बजे से रात 8:56 बजे के बीच का समय विशेष फलदायी माना गया है। शास्त्रों में प्रदोष काल की पूजा को सबसे अधिक प्रभावी बताया गया है, इसलिए संभव हो तो इसी समय पूजा करें।

प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा बहुत कठिन नहीं है, बस मन में सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए।

  • संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शिव जी के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
  • साफ-सफाई: घर के मंदिर को साफ करें और भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
  • प्रिय वस्तुएं: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और गाय का कच्चा दूध अर्पित करें।
  • मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
  • आरती: अंत में घी के दीपक से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

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व्रत खोलने का सही समय

व्रत रखना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका पारण यानी समापन भी है। रवि प्रदोष व्रत का पारण 2 मार्च को किया जाएगा। पारण का पहला शुभ समय सुबह 6:12 बजे से 7:38 बजे तक रहेगा। अगर इस समय संभव न हो, तो सुबह 9:07 बजे से 10:34 बजे के बीच भी पारण किया जा सकता है। सही मुहूर्त में पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत कुंडली में सूर्य की स्थिति को भी मजबूत करता है, जिससे समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और जीवन में शुभता का आगमन होता है।

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