जियो रे बिहार के लाला… ईशान किशन की दमदार वापसी, गुमनामी से निकलकर पाकिस्तान के खिलाफ बने जीत के हीरो

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बिहार। पटना में जन्मे विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और धैर्य का फल जरूर मिलता है। लंबे समय तक टीम इंडिया से बाहर रहने और केंद्रीय अनुबंध खत्म होने जैसी मुश्किलों के बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ 77 रन की बेहतरीन पारी खेली और फैंस का दिल जीत लिया। शुभमन गिल की जगह टीम में शामिल किए गए ईशान टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए।

दो साल का मुश्किल दौर, लेकिन नहीं टूटा हौसला

हमेशा मुस्कुराते रहने वाले 27 वर्षीय ईशान किशन के लिए पिछले दो साल आसान नहीं रहे। साल 2024 में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर उनका टेस्ट डेब्यू लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अंतिम समय में टीम मैनेजमेंट ने केएल राहुल को विकेटकीपर के रूप में मौका दे दिया। इससे ईशान की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। जब उन्हें लगा कि खेलने का मौका नहीं मिलेगा, तो वह छुट्टी लेकर भारत लौट आए। इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट नहीं खेला और बड़ौदा में हार्दिक पांड्या के साथ अभ्यास शुरू कर दिया। रणजी ट्रॉफी की जगह आईपीएल को प्राथमिकता देने के कारण BCCI ने उनका केंद्रीय अनुबंध भी समाप्त कर दिया, जिससे वह लगभग दो साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहे।

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न्यूजीलैंड सीरीज से बदली किस्मत

कड़ी मेहनत और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद ईशान की न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में वापसी हुई। 29 नवंबर 2023 के बाद उन्होंने 21 जनवरी को अपना पहला T-20 मुकाबला खेला। इस सीरीज में उन्होंने 08, 76, 28 और 103 रन की पारियां खेलकर चयनकर्ताओं का भरोसा जीत लिया। वर्ल्ड कप में भी उनका बल्ला जमकर बोला और तीन पारियों में 20, 61 और 77 रन बनाकर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित कर दी।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच बनाई जगह

ऋषभ पंत की वापसी, ध्रुव जुरेल का उभरता प्रदर्शन, संजू सैमसन और जितेश शर्मा जैसे विकल्पों की मौजूदगी के बीच टीम इंडिया में वापसी करना आसान नहीं था। लेकिन ईशान ने आलोचनाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से दिया।

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 अनुशासन और बदलाव ने दिलाई नई पहचान

वापसी के लिए ईशान ने अपनी दिनचर्या पूरी तरह बदल दी। उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) शुरू किया और पिता प्रणव पांडेय की सलाह पर श्रीमद्भगवद्गीता पढ़नी शुरू की। फिटनेस और पोषण पर ध्यान देने के लिए निजी शेफ रखा, नियमित अभ्यास और बेहतर नींद को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।  उनके बड़े भाई और डॉक्टर राज किशन ने तकनीकी सुधार में अहम भूमिका निभाई। नेट्स में घंटों अभ्यास और मैच परिस्थितियों की सिमुलेशन ट्रेनिंग ने उनके शॉट चयन और मानसिक मजबूती को नई धार दी।

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निस्वार्थ खेल ने जीता दिल

मजाकिया स्वभाव और चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखने वाले ईशान किशन निस्वार्थ होकर टीम के लिए खेलते हैं। यही गुण कोच गौतम गंभीर को भी बेहद पसंद है। झारखंड की कप्तानी के दौरान भी उन्होंने व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा टीम को प्राथमिकता दी। गुमनामी के दौर से निकलकर ईशान किशन ने एक बार फिर साबित कर दिया-असली खिलाड़ी वही है जो मुश्किल वक्त में खुद को फिर से गढ़ ले।

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