शाश्वत तिवारी
म्यूनिख। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान डॉ. जयशंकर ने ‘मल्टीपोलैरिटी की मांगों को पूरा करने के लिए एक तेज और डायनामिक फॉरेन पॉलिसी’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों के लिए भारत के समर्थन को भी दोहराया। विदेश मंत्री ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के अध्यक्ष वोल्फगैंग इचिंगर से वार्ता की और जी7 देशों के विदेश मंत्रियों सहित अन्य कई देशों के प्रतिनिधियों से भी द्विपक्षीय मुलाकात की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. जयशंकर ने कहा कि म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2026 ने विचार प्रस्तुत करने तथा दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने का बेहतरीन अवसर प्रदान किया। जयशंकर ने समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा और भारत की गतिशील विदेश नीति पर भी जोर दिया। इस दौरान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते तथा रणनीतिक स्वायत्तता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
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जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा समुद्री कम्युनिकेशन लाइनों की सुरक्षा, फर्स्ट रिस्पॉन्डर के तौर पर काम करने, पोर्ट सिक्योरिटी को मजबूत करने और मजबूत सबमरीन केबल इंफ्रास्ट्रक्चर में योगदान देने में हमारी भूमिका पर जोर दिया गया। हमारी बातचीत से भारत और जी7 के बीच कई समानताएं और साझा हित सामने आए। डॉ. जयशंकर ने अपने जर्मन समकक्ष जोहान वेडफुल के साथ एक पैनल चर्चा के दौरान भारत-जर्मनी और भारत-ईयू संबंध ग्लोबल सिक्योरिटी और डीरिस्किंग में कैसे योगदान दे रहे हैं, इस पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने सम्मेलन से इतर कई देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात की और अलग-अलग डोमेन में सहयोग की प्रगति का आकलन किया।

उन्होंने भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील की जी4 मीटिंग में सुधार वाले मल्टीलेटरलिज्म पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने बहुध्रुवीयता की मांगों को पूरा करने के लिए ‘फुर्तीली और गतिशील विदेश नीति’ के महत्व को रेखांकित किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत ने हाल ही में 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया है।
