नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आम बजट 2026 पेश करते हुए टेक्नोलॉजी सेक्टर को लेकर बड़ा एलान किया। बजट की प्रमुख घोषणाओं में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) सबसे अहम रहा। वित्त मंत्री ने कहा कि घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सेमीकंडक्टर पर केंद्र सरकार इतना जोर क्यों दे रही है और इसे बजट की प्राथमिकता क्यों बनाया गया है।
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सेमीकंडक्टर क्यों बन गए रणनीतिक जरूरत
आज के दौर में सेमीकंडक्टर किसी भी आधुनिक तकनीक की रीढ़ बन चुके हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल डिवाइस, एआई आधारित गैजेट्स, 5G नेटवर्क और रक्षा उपकरण—लगभग हर सेक्टर सेमीकंडक्टर चिप पर निर्भर है। भारत लंबे समय से इन चिप्स के लिए आयात पर निर्भर रहा है। खासकर चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से सप्लाई बाधित होने पर भारत की इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगता है। इसी निर्भरता को खत्म करने के लिए सरकार ISM 2.0 को आगे बढ़ा रही है।
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ISM 2.0 से क्या बदलेगा
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का उद्देश्य केवल चिप मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसमें डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग सभी स्तरों पर निवेश को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि ISM 2.0 से भारत न सिर्फ अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि आने वाले समय में ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा भी बन सकता है।
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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिशन भारत को सेमीकंडक्टर का उपभोक्ता भर नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में अहम साबित होगा। रक्षा, ऑटोमोबाइल, आईटी और टेलीकॉम जैसे सेक्टरों में इससे भारत की रणनीतिक मजबूती भी बढ़ेगी।
