शहीद शिरोमणि के 201वें शहादत दिवस पर विशेष

Untitled 1 copy 22
  • छत्तीसगढ़ के शहीद शिरोमणि को भूला दिया है समाज ने
  • 201 साल पहले 20 जनवरी 1825 को दी गई थी फांसी
  • उनके 200वीं पुण्यतिथि पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं

हेमंत कश्यप

जगदलपुर । इन दिनों आदिवासी संस्कृति संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरे बस्तर में बस्तर पंडुम मनाया जा रहा है, लेकिन 200 साल पहले जिस शख्स ने बस्तर के आदिवासियों को अन्याय और शोषण से बचाने के अपने जान की आहुति दी। उसे भूला दिया गया है। शासन तो दूर सामाजिक स्तर पर भी उनके 201वें शहादत दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित करने की खबर नहीं है।
गेंदसिंह बस्तर के परलकोट जमींदार थे, जिन्होंने 1824-25 में अंग्रेजों और मराठों के शोषण के खिलाफ पहला संगठित आदिवासी विद्रोह (परलकोट विद्रोह) खड़ा किया । उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम आदिवासी शहीद माना जाता है। जिन्हें 20 जनवरी 1825 को परलकोट के महल के सामने फांसी दी गई थी, और वे आज भी आदिवासी समाज में स्वाभिमान और क्रांति के प्रतीक हैं, जिन्हें “भूमिया राजा” के नाम से भी जाना जाता है। गेंदसिंह परलकोट परगना (जिसे हम अब पखांजूर क्षेत्र कहते हैं) के जमींदार थे। जो उन दिनों बस्तर क्षेत्र में था और यहां मराठा व ब्रिटिश शासन था। स्थानीय लोग उन्हें “भूमिया राजा” कहते थे, चूंकि उनके पूर्वज पहाड़ियों से उत्पन्न माने जाते थे और उन्हें ‘जमींदार’ की उपाधि मिली थी। वे न्यायप्रिय थे और अपने लोगों के शोषण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध थे।

ये भी पढ़े

लगातार बढ़ रहे हैं फैटी लीवर के मामले, भारत में 38% लोग इस बीमारी से हैं प्रभावित, जानें मुख्य संकेत

परलकोट विद्रोह के थे जनक

अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और कर-वसूली से आदिवासी समाज असहनीय स्थिति में था। गेंदसिंह ने 24 दिसंबर 1824 को आदिवासी समुदाय को एकजुट किया और विद्रोह का बिगुल फूंका। विद्रोहियों ने अंग्रेजों के कार्यालयों और गोदामों पर हमले किए थे।

ये भी पढ़े

वाह रे कानून: गैंगरेप की पीड़िता इंसाफ के इंतजार में चल बसी, लेकिन नहीं मिला इंसाफ

महल के सामने ही फांसी

10 जनवरी 1825 को गेंद सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और 20 जनवरी 1825 को परलकोट में उनके महल के सामने ही उन्हें फांसी दे दी गई। उनका बलिदान बस्तर की मुक्ति के लिए एक अविस्मरणीय उदाहरण है और छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन का आधार बना। अबूझमाड़ के सीताराम गाँव में मंदिरों, प्रतिमाओं और परंपराओं के रूप में जीवित है और उनके फांसी स्थल के संरक्षण की मांग की जा रही है।

Spread the love

संभल के श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को मिली बम से उड़ाने की धमकी
Crime News homeslider Uttar Pradesh

संभल के श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को मिली बम से उड़ाने की धमकी

पुलिस महकमे में हड़कंप, बब्बर खालसा से जुड़े होने का दावा     -ए अहमद सौदागर लखनऊ । यूपी के संभल जिले में स्थित निर्माणाधीन श्री कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को जान से मारने की धमकी मिली है। आचार्य ने विदेशी नंबर से आए धमकी भरे कॉल को लेकर संभल एसपी को […]

Spread the love
Read More
UP HEALTH
Analysis homeslider Raj Dharm UP

मातृशक्तियों ने संभाली UP HEALTH की कमान, लगातार सात महिलाओं के जिम्मे महकमा

प्रमुख सचिव से लेकर अहम पदों पर महिला अधिकारियों की तैनाती, DG, MD सब महिलाएं हेकाली झेमोमी की तैनाती के साथ ही बदल गई स्वास्थ्य विभाग की तस्वीर जिले से लेकर शासन स्तर तक हावी है आधी-आबादी, 10 जिलो में डीएम, दो में मंडलायुक्त एक साल पहले यानी 18 सितम्बर 2025 से सूबे के सेहत […]

Spread the love
Read More
महराजगंज
homeslider Uncategorized Uttar Pradesh

महराजगंज में बाढ़ के खतरे पर प्रशासन अलर्ट, तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी

महराजगंज में बाढ़ के खतरे पर प्रशासन अलर्ट -उमेश चन्द्र त्रिपाठी महराजगंज, 26 सितंबर 2026। जिले में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन ने बाढ़ की संभावित स्थिति को लेकर निगरानी तेज कर दी है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने शनिवार को फरेन्दा, नौतनवां और निचलौल तहसील के […]

Spread the love
Read More