- मणिपुर गैंग रेप पीड़िता की मौत के खिलाफ प्रदर्शन
नई दिल्ली। मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान गैंगरेप की शिकार एक 20 वर्षीय कुकी-ज़ो युवती ने इंसाफ की आस में दम तोड़ दिया। 10 जनवरी 2026 को गुवाहाटी के अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मई 2023 में, जब मणिपुर में मैतेई-कुकी संघर्ष शुरू हुआ, 18 साल की यह लड़की इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में एटीएम से पैसे निकालते समय अगवा कर ली गई। आरोप है कि कुछ सशस्त्र लोगों ने उसे पहाड़ी इलाके में ले जाकर किया और नाले में फेंक दिया। एक ऑटोरिक्शा चालक ने उसे बचाया।
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जुलाई 2023 में कांगपोकपी पुलिस में शिकायत दर्ज हुई, FIR इंफाल ईस्ट के पोरोम्पत थाने में दर्ज की गई। CBI को मामला ट्रांसफर हुआ, लेकिन ढाई साल बाद भी कोई आरोपी पहचाना या गिरफ्तार नहीं हुआ। पीड़िता को गंभीर चोटें, गर्भाशय जटिलताएं और गहरा मानसिक आघात हुआ। वह कांगपोकपी, कोहिमा, गुवाहाटी के अस्पतालों में इलाज कराती रही, लेकिन ट्रॉमा से कभी उबर नहीं पाई। सांस लेने में तकलीफ, अनिद्रा जैसी समस्याएं बनी रहीं। कुकी-ज़ो संगठन जैसे ITLF और COTU ने इसे शर्मनाक बताया। मौत के बाद मोमबत्ती जुलूस निकाले गए, न्याय की मांग तेज हुई। यह घटना मणिपुर की महिलाओं पर हुई यौन हिंसा की कई घटनाओं में से एक है।
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई (घाटी बहुसंख्यक) और कुकी-ज़ो (पहाड़ी जनजाति) के बीच हिंसा जारी है। मैतेई को ST दर्जा देने की मांग से शुरू हुआ विवाद भूमि, आरक्षण पर केंद्रित है। 260+ मौतें, 60,000+ विस्थापित, हजारों घर-धार्मिक स्थल जले। फरवरी 2025 में CM एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लगा। अब ‘बफर जोन’ दोनों को अलग रखता है, लेकिन अलग प्रशासन की मांग बढ़ रही है। पीड़िता की मौत ने न्याय व्यवस्था की नाकामी पर सवाल खड़े किए हैं।
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