हिंदू कायर हैं, मुसलमान धन्य हैं…’ माघ मेले की घटना के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा बयान

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प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन हुई कथित अव्यवस्था और संतों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान सुर्खियों में है। सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रशासन के साथ-साथ हिंदू समाज और सरकार पर भी तीखे शब्दों में हमला बोला। उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी सनातनी, साधु या संत को गंगा स्नान के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या कोई बच्चा अपनी मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेता है?” उन्होंने मेला प्रशासन पर आरोप लगाया कि पालकी परंपरा के बावजूद उन्हें जबरन रोका गया और उनके साथ आए बटुकों व संन्यासियों से मारपीट की गई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि मौनी अमावस्या के दिन उनका पूरा स्नान कार्यक्रम तीन दिन पहले ही प्रशासन को लिखित रूप में सौंप दिया गया था। पुलिस के साथ समन्वय में वे अपने शिविर से संगम की ओर निकले थे और बैरिकेड भी पुलिस की मौजूदगी में ही खोले गए। इसके बावजूद उनके लोगों पर उद्दंडता का आरोप लगाया गया, जबकि किसी अधिकारी ने मौके पर आकर स्थिति स्पष्ट नहीं की।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके डंडी संन्यासियों को बाल पकड़कर घसीटा गया, जूतों से पीटा गया और बुजुर्ग संतों के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। उन्होंने खून से सना दुपट्टा दिखाकर मारपीट के दावों को सही ठहराया।

इस दौरान शंकराचार्य का सबसे विवादित बयान हिंदू समाज को लेकर सामने आया। उन्होंने कहा, “हिंदू कायर हैं जो गौ माता की हत्या पर सड़कों पर नहीं उतरते, जबकि मुसलमान धन्य हैं जो अपने धर्म की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े हो जाते हैं।” उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मेला प्रशासन पर भी निशाना साधा। प्रयागराज के वरिष्ठ अधिकारियों पर झूठी जानकारी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर चाहते, तो स्थिति को संभाला जा सकता था। शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने अपनी भूल नहीं सुधारी तो उनका विरोध जारी रहेगा।

फिलहाल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया है कि वे किसी अनशन पर नहीं बैठे हैं, लेकिन माघी पूर्णिमा तक पालकी पर ही रहेंगे और तब तक शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक संतों के स्नान को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय नहीं हो जाता।

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