दंडित नहीं किए जाने से बेखौफ और बेलगाम हुए जेल अफसर

आईजी
  • भ्रष्टाचार खुलासे पर बढ़ जाती DIG की वसूली!
  • प्रदेश की जेलों में अवैध वसूली के बाद नहीं हो रही कार्रवाई

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। प्रदेश की जेलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के सुर्खियों में आने पर दोषियों की खिलाफ कार्रवाई हो न हो लेकिन इससे परिक्षेत्र के डीआईजी की वसूली जरूर बढ़ जाती है। यह बात हम नहीं विभागीय अधिकारी कह रहे है। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद कारागार विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई खौफ ही दिखाई नहीं पड़ रहा है। यही वजह है कि जेलों में भ्रष्टाचार के मामले सुर्खियों में आने के बाद भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। इससे जेल अफसर बेखौफ होने के साथ बेलगाम भी हो गए है।

सूत्रों का कहना है कि वर्तमान समय में प्रदेश की जेलों में अधिकारियों ने लूट मचा रखी है। विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें बचा लिए जा रहा है। बुलंदशहर जेल इसका जीता जागता उदाहरण बनी हुई है। जेल में अधीक्षक की अवैध वसूली से बंदी त्रस्त है वहीं ड्यूटी और छुट्टी को लेकर जेल सुरक्षाकर्मी और अधिकारी अलग परेशान है। डी आईजी स्तर की जांच होने के बाद भी इस आरोपी अधीक्षक के खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसी प्रकार बीते दिनों एटा जेल पर जेलर के सरकारी आवास पर महिला के हंगामे के बाद अधीक्षक को छोड़िए दोषी जेलर के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधीक्षक को तोहफे में फिरोजाबाद जेल पर तैनात कर दिया गया। इस जेल में भी अधीक्षक ने लूट मचा रखी है। तत्कालीन परिक्षेत्र डीआईजी ने आरोपी जेलर के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उसे पहले झांसी और उसके कुछ दिन बाद केंद्रीय कारागार नैनी पर विशेष ड्यूटी लगाकर मामले को निपटा दिया गया। इसी प्रकार राजधानी की आदर्श कारागार में प्रशिक्षक की पिटाई करने वाले दो डिप्टी जेलरों को बचाने के लिए पहले मामले को दबाए रखा गया। मामले की शिकायत आयोग में होने और तलब किए जाने पर आरोपी डिप्टी जेलरों को अस्थाई ड्यूटी पर लगाया गया और कुछ ही दिन बाद इन्हें वापस आदर्श कारागार वापस बुला लिया गया। वही पिटाई का शिकार हुए प्रशिक्षक को मामले की पैरवी न करने पाए इसके लिए फतेहगढ़ जेल पर लगाकर मामले को रफा दफा कर दिया गया। दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।

सूत्रों का कहना है कि जेलों में होने वाली अवैध वसूली, अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के मामलों पर शासन और मुख्यालय स्तर पर कोई कार्रवाई हो या न हो लेकिन इन मामलों के संज्ञान में आने पर परिक्षेत्र के डीआईजी की वसूली जरूर बढ़ जाती है। बीते दिनों कन्नौज जेल में सपा की पूर्व दो ब्लॉक प्रमुखों की जेल अन्दर अन्य बंदियों के नाम पर पर्ची लगाकर मुलाकात कराए जाने का मामला सुर्खियों में आया। इस मामले को भी दबा दिया गया। यह मामले विभागीय अधिकारियों और कर्मियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही है। चर्चा है कि मामलो के संज्ञान में आने पर परिक्षेत्र के डीआईजी कार्यवाही करने के बजाए वसूली करके मामलों को निपटा दे रहे है। इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई।

मूल तैनाती स्थल पर कब भेजे जाएंगे विशेष ड्यूटी के जेलर!

जेलों पर दंडित किए गए अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की अस्थाई ड्यूटी लगाने में भी बड़ा खेल चल रहा है। विभाग में कर्मियों की अस्थाई ड्यूटी दो माह, तीन माह और अग्रिम आदेश तक के लिए लगाई जाती है। आला अफसर अस्थाई ड्यूटी लगाकर भूल जा रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक आजमगढ़ जेल पर तैनात जेलर विकास कटियार फिरोजाबाद जेल पर, झांसी जेल पर तैनात कस्तूरी लाल गुप्ता बागपत पर, एटा जेल पर तैनात जेलर प्रदीप कश्यप केंद्रीय कारागार नैनी पर, एटा जेल पर तैनात जेलर वीरेंद्र वर्मा को प्रतापगढ़ जेल समेत तमाम जेलर और डिप्टी जेलरों को समयावधि पूरी होने के बाद भी मूल तैनाती स्थल पर वापस नहीं किया गया है। विभाग में इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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