Iran Protests: प्रदर्शनकारियों पर सख्ती के संकेत, ईरान की न्यायपालिका ने फांसी को लेकर दिया बयान

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Iran Protests: ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां की न्यायपालिका की ओर से बेहद सख्त रुख अपनाने के संकेत मिले हैं। देश के मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों में देरी नहीं की जाएगी और उन्हें कड़ी सजा दी जा सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

मोहसेनी-एजेई की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मानवाधिकार संगठनों ने आशंका जताई है कि बड़ी संख्या में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा दी जा सकती है। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी एक वीडियो में न्यायपालिका प्रमुख को यह कहते हुए सुना गया कि फैसले तुरंत होने चाहिए, ताकि उनका “प्रभाव” बना रहे।

“देरी का कोई फायदा नहीं”

वीडियो संदेश में मोहसेनी-एजेई ने कहा कि अगर कोई निर्णय लेना है तो वह तुरंत लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर सजा देने में महीनों की देरी होती है, तो उसका असर कम हो जाता है। उनके इस बयान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका समेत कई देशों ने ईरान को चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पहले ईरान को गंभीर परिणामों की चेतावनी दे चुके हैं।

हिंसा में हजारों लोगों की मौत का दावा

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़ा हाल के दशकों में ईरान के किसी भी आंदोलन में हुई मौतों से कहीं अधिक है। कई विश्लेषकों का मानना है कि हालात 1979 की इस्लामी क्रांति के दौर जैसी अस्थिरता की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।

डर के साये में आम लोग

तेहरान समेत कई शहरों में आम नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है। एक स्थानीय महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गोलीबारी और हिंसा की खबरों से लोग बेहद डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सड़कों पर फिलहाल शांति दिख रही हो, लेकिन स्कूल बंद हैं और माता-पिता अपने बच्चों को बाहर भेजने से डर रहे हैं।

“यह विरोध था, युद्ध नहीं”

36 वर्षीय अहमदरेजा तवाकोली ने मीडिया को बताया कि उन्होंने तेहरान में एक प्रदर्शन देखा, जो अचानक हिंसक हो गया। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी केवल अपनी आवाज उठाने आए थे, उनके पास कोई हथियार नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा बलों की ओर से किया गया, जिससे हालात और बिगड़ गए।

ईरान में हालात फिलहाल बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में न्यायपालिका के कदम देश और दुनिया दोनों के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

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