अपने ही काफी हैं विरासत मिटाने को’—रोहिणी आचार्य के शब्दों में छलका लालू परिवार का दर्द

 Bihar : लालू प्रसाद यादव के परिवार में लंबे समय से चल रही अनबन अब खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ चुकी है। परिवार और राजनीति से किनारा करने का ऐलान कर चुकीं रोहिणी आचार्य ने फेसबुक पर साझा की गई एक भावनात्मक पोस्ट के जरिए फिर से अपने मन की पीड़ा जाहिर की है। इस पोस्ट में उन्होंने रिश्तों, पहचान और विश्वास के टूटने की गहरी व्यथा को शब्दों में पिरोया है।

रोहिणी आचार्य ने अपने संदेश में कहा कि किसी मजबूत विरासत को कमजोर करने के लिए बाहरी दुश्मनों की जरूरत नहीं होती। अपने ही लोग और कुछ स्वार्थी नए रिश्ते ही इसके लिए काफी होते हैं। यह बयान सीधे तौर पर परिवार के भीतर चल रहे मतभेदों की ओर इशारा करता है, जहां विश्वास और सम्मान की जगह आरोपों ने ले ली है।

उन्होंने यह भी लिखा कि जिस व्यक्ति की वजह से पहचान और अस्तित्व मिलता है, उसी की छवि को मिटाने की कोशिश जब अपने ही करने लगें, तो यह सबसे बड़ा धोखा होता है। रोहिणी के शब्दों में विवेक के ढक जाने और अहंकार के हावी होने की बात यह दर्शाती है कि भावनाओं के बजाय स्वार्थ ने रिश्तों को दिशा दी है।

इससे पहले रोहिणी आचार्य ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए परिवार छोड़ने की घोषणा की थी। उस पोस्ट में उन्होंने खुद पर लगाए गए आरोपों और अपमानजनक शब्दों का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि पिता को किडनी दान देने जैसे संवेदनशील विषय पर भी उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए, जिससे वे बेहद आहत हुईं।

उनकी ये पोस्ट केवल व्यक्तिगत पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस दबाव और संघर्ष को भी उजागर करती है, जो राजनीतिक परिवारों में अक्सर देखने को मिलता है। रोहिणी आचार्य की बातें यह संकेत देती हैं कि यह विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में इसके और पहलू सामने आ सकते हैं।

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