लखनऊ: प्रयागराज की संगम रेती एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और भीड़ के महासागर में बदलती नजर आ रही है। माघ मेला 2026 की शुरुआत के साथ ही यहां महाकुंभ जैसी तस्वीरें सामने आने लगी हैं। संगम स्नान के लिए श्रद्धालुओं का रेला इस कदर उमड़ रहा है कि यह आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बड़ी परीक्षा बन गया है।
हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी लगभग दो साल का वक्त बाकी है, लेकिन माघ मेला 2026 को योगी सरकार के प्रदर्शन की पहली बड़ी कसौटी माना जा रहा है। अनुमान है कि 44 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन में 15 से 20 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे। पिछले वर्ष जहां करीब 6 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं इस बार संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है। माना जा रहा है कि प्रदेश का हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में माघ मेले से जुड़ेगा। पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर ही रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली। सुबह तीन बजे तक प्रयागराज में लगभग 24 लाख श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। वहीं वाराणसी के घाटों पर 10 लाख, अयोध्या में साढ़े पांच लाख और मथुरा में ढाई लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। इससे साफ है कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से पूरा प्रदेश सक्रिय मोड में है। माघ मेले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। मेला क्षेत्र को लगभग 800 हेक्टेयर में बसाया गया है, जहां श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है। अस्थायी घाटों, पांटून पुलों, शौचालयों और चिकित्सा सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।
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सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए मेला क्षेत्र में 17 थाने, 42 पुलिस चौकियां और सैकड़ों सीसीटीवी व एआई आधारित कैमरे लगाए गए हैं। जल पुलिस, एनडीआरएफ, एटीएस और पीएसी की तैनाती यह संकेत देती है कि सरकार किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती। सीएम योगी ने साफ निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। महाकुंभ में बने रिकॉर्ड के बाद अब माघ मेला भी नई इबारत लिखने को तैयार है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और सरकार की छवि का भी बड़ा पैमाना बन चुका है।
