अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार से भव्य धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई है। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालुओं की आस्था एक बार फिर चरम पर दिखाई दे रही है। इन अनुष्ठानों का मुख्य आयोजन 31 दिसंबर को होगा, जिसमें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह संपूर्ण पूजा-अनुष्ठान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। बेंगलुरु विद्यापीठ से आए 15 वैदिक विद्वान वैदिक विधि-विधान से पूजा संपन्न करा रहे हैं। शनिवार को मंदिर परिसर में कवच स्थापना, विशेष हवन और भगवान की पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु शामिल हुए।
स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ ने जानकारी दी कि इन अनुष्ठानों के अंतर्गत तत्व हवन, एक तत्व कलश पूजन, गणपति पूजन और अन्य वैदिक कर्मकांड किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर को प्रतिष्ठा द्वादशी के दिन रामलला का पंच रसों से अभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे, साथ ही भजन-कीर्तन और भव्य आरती का आयोजन होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष अनुष्ठानों के दौरान ढोल उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिससे आयोजन और भी भव्य बनेगा। इसके अलावा रत्न जड़ित प्रतिमा की स्थापना को लेकर न्यास स्तर पर बैठकें जारी हैं। पिछली वर्षगांठ के दौरान हुए सभी धार्मिक कर्मकांड इस बार भी उसी श्रद्धा और परंपरा के साथ दोहराए जा रहे हैं।
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 22 जनवरी 2024 को रामलला की ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा की गई थी, जिसे देश-दुनिया ने देखा। इसके बाद से अयोध्या श्रद्धा और भक्ति का वैश्विक केंद्र बनकर उभरी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर के लिए सभी वीआईपी पास 1 जनवरी 2026 तक जारी किए जा चुके हैं। बीते एक महीने से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसके बावजूद दर्शन व्यवस्था पूरी तरह सुचारू बनी हुई है। आम श्रद्धालुओं को लगभग आधे घंटे के भीतर दर्शन का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रतिदिन सीमित संख्या में दर्शन पास जारी किए जाते हैं। दो घंटे के एक स्लॉट में 400 पास निर्धारित हैं, जो पहले ही जारी हो चुके हैं। आरती के लिए भी सभी पास भर चुके हैं। प्रशासन और न्यास का प्रयास है कि हर श्रद्धालु को सहज और सुरक्षित दर्शन का अनुभव मिले।
