असम के पहाड़ी जिले कार्बी आंगलोंग में हालिया हिंसा ने एक बार फिर जमीन, पहचान और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गहरे सामाजिक तनाव को उजागर कर दिया है। फिलहाल जिले में शांति बनी हुई है, लेकिन हालात को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए निषेधाज्ञा और रात्रि कर्फ्यू लागू कर रखा है। यह विवाद व्यावसायिक और ग्राम चराई आरक्षित भूमि (PGR और VGR) पर कथित अतिक्रमण को लेकर चल रहा है। स्थानीय संगठनों का कहना है कि वर्षों से इन जमीनों पर बाहरी लोगों ने कब्जा जमा रखा है, जिससे आदिवासी समुदाय के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसी मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के लोग पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे।
स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब यह अफवाह फैली कि भूख हड़ताल कर रहे तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसी के बाद प्रदर्शन उग्र हो गया और खेरोनी इलाके में हिंसक घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने KAAC प्रमुख के आवास और बाजार की दुकानों में आगजनी की, जबकि पुलिस को हालात काबू में लाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की खबर पूरी तरह गलत थी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की जा रही है और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री लगातार जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों के संपर्क में हैं।
हिंसा के बाद असम सरकार ने स्थिति संभालने के लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों को मौके पर भेजा। डीजीपी हरमीत सिंह और मंत्री रानोज पेगू ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। प्रशासन का कहना है कि बातचीत के जरिए ही इस विवाद का स्थायी समाधान संभव है।
फिलहाल, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और बातचीत से जमीन विवाद का हल निकाला जाएगा।
