लखनऊ। अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन के एक मजबूत स्तंभ और पूर्व भाजपा सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का 15 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के रीवा में निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे कुछ सूत्रों में 75 वर्ष उल्लेखित। रीवा में रामकथा आयोजन के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। 10 दिसंबर को दिल्ली से रीवा पहुंचे वेदांती को सीने में दर्द और संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किए, लेकिन वे बच नहीं सके।
डॉ. वेदांती राम मंदिर निर्माण की लड़ाई के प्रमुख चेहरों में से एक थे। उन्होंने 1990 के दशक में इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भाजपा के टिकट पर वे दो बार सांसद चुने गए और संसद से लेकर सड़कों तक राम मंदिर की मांग को बुलंद आवाज दी। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहते हुए उन्होंने सनातन धर्म और हिंदुत्व की सेवा को जीवन समर्पित कर दिया। उनके निधन से राम भक्तों, संत समाज और राजनीतिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वेदांती जी का गोलोकगमन आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका त्यागपूर्ण जीवन सभी के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रभु राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को चरणों में स्थान दें।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वेदांती का पार्थिव शरीर मध्य प्रदेश से अयोध्या लाया जा रहा है, जहां अंतिम संस्कार होगा। अयोध्या में उनके निवास पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उनका जाना राम मंदिर आंदोलन के एक स्वर्णिम युग का अंत है।
