- ग्रामीणों से खंभे के बदले ‘रिश्वत’ मांग रहे अधिकारी
विजय कुमार
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क विद्युत लाइनें बिछाने का दावा कर रही है, वहीं बाराबंकी जिले में विद्युत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी खुलेआम मनमानी और भ्रष्टाचार पर उतर आए हैं। यह मामला सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की बड़ी खाई को दर्शाता है। जिले के विकासखंड सिद्धौर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अलीगढ़ (पावर हाउस-देवीगंज) में लगभग दो साल पहले एक आंधी-तूफान के कारण बिजली के छह- सात पोल टूट गए थे। इस लाइन से 22 घरों का कनेक्शन जुड़ा हुआ है। विभाग की चरम लापरवाही यह है कि टूटे हुए खंभों को बदलने के बजाय, बिजली की लाइन को खतरनाक तरीके से पेड़ों के सहारे जमीन के पास लटकाकर चालू कर दिया गया है। यह जर्जर और लटकी हुई लाइन पिछले दो वर्षों से ग्रामीणों के लिए 24 घंटे मौत का खतरा बनी हुई है।
विभाग क्या किसी बड़ी घटना का कर रहा इंतजार
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले एक बार गाँव में बड़ा हादसा होने से बचा था। बावजूद इसके, विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। यह घटना स्पष्ट करती है कि बिजली विभाग के अधिकारी किसी की जान चली जाने या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं, जो उनकी अमानवीय संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार को दिखाता है। यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि बिजली विभाग इतना पड़ोसी (प्रदूषित) और प्रदोषी कैसे हो सकता है?
‘पैसा दो, तब खंभा लगेगा’…खुलेआम उगाही का आरोप
इस जानलेवा स्थिति से तंग आकर आज ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों, जिनमें सोनू वर्मा, पंकज वर्मा, रामसागर वर्मा, धीरज वर्मा, केशव राम वर्मा, आशु वर्मा, और लल्लू वर्मा शामिल हैं, विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने कई बार 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत की और लिखित आवेदन भी दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि, शिकायत के बदले संबंधित जेई और एसडीओ ने नया खंभा लगाने के लिए रिश्वत की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है, कि JE और SDO साफ कहते हैं कि ‘पैसा दो, तब तुम्हारे गाँव में नए पोल लगवाए जाएँगे, नहीं तो पोल नहीं लगेंगे। तुमको जो करना है, कर लो। जहाँ जाना है, वहाँ तक चले जाओ, लेकिन पोल तो हमें ही लगाना है।’ बिजली विभाग में बिना पैसे के कोई कार्य नहीं हो रहा है।
