शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद भवन में उस समय हंगामा मच गया जब वरिष्ठ कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी अपनी सरकारी कार में एक छोटा सा पपी लेकर परिसर में दाखिल हो गईं। सुरक्षा कर्मियों ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो कुत्ता दिखाई दिया। मामला तूल पकड़ने पर रेणुका चौधरी ने मीडिया से बातचीत में पूरी घटना का ब्योरा दिया और सरकार पर करारा हमला बोला।
उन्होंने बताया, “मैं सुबह संसद आ रही थी। रास्ते में एक कार और स्कूटर की टक्कर हो गई थी। उस हादसे के बाद सड़क पर एक नन्हा पपी इधर-उधर भाग रहा था। मुझे डर लगा कि कहीं इसे कोई गाड़ी कुचल न दे। मैंने उसे गोद में उठाया, कार में बैठाया और संसद लाई। वापसी में वही कार चली गई और कुत्ता भी उसके साथ चला गया। मैंने ड्राइवर से कहा कि इसे घर पर रख लें। बस इतनी सी बात है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या संसद परिसर में कुत्ता लाना नियमों के खिलाफ है, तो रेणुका जी ने तल्ख लहजे में जवाब दिया, “क्या कोई ऐसा कानून है जो कहता हो कि बेजुबान जानवर को बचाना गुनाह है? असली काटने वाले तो पार्लियामेंट के अंदर बैठे हैं। वे रोज जनता को काटते हैं, नीतियों से काटते हैं, महंगाई से काटते हैं। हमने एक मासूम जानवर की जान बचाई, वो बड़ा अपराध हो गया? सरकार के पास जनता के असली मुद्दे सुलझाने के लिए वक्त नहीं है क्या?”
इस घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। कुछ यूजर्स ने रेणुका चौधरी की संवेदनशीलता की तारीफ की, तो कुछ ने इसे संसद की गरिमा का उल्लंघन बताया। वहीं विपक्ष इस मौके को सरकार पर हमलावर होने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। दूसरी तरफ, सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को संदेश दिया था कि “हार की भड़ास सदन में न निकालें” और रचनात्मक चर्चा करें। लेकिन पहले ही दिन अधीर रंजन चौधरी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत तमाम विपक्षी सांसद वायु प्रदूषण, मणिपुर हिंसा, बेरोजगारी और किसान मुद्दों पर हंगामा करते नजर आए। स्पीकर ने कई बार सदन स्थगित करना पड़ा।
