- दर्जन भर से अधिक पुलिस वाले तफ्तीश में जुटे, फिर भी हाथ खाली
- ग्यारह साल बीतने के बाद भी नहीं मिले हत्यारे, थककर बैठ गई पुलिस
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। दस जुलाई वर्ष 2014 दिन गुरुवार को गोसाईगंज क्षेत्र स्थित गंजरिया फार्म के जंगल में दो शव पेड़ से फांसी पर लटके मिले थे। शव बुरी तरह से सड़ चुके थे और बदबू भी आ रही थी। जंगल में दो लोगों की लाश मिलने की खबर मिलते ही पुलिस हिलीडुली और मौके पर पहुंची। पुलिस शवों को कब्जे में लेकर छानबीन कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस मामले में शवों की पहचान कराने तथा कातिलों की तलाश में करीब एक दर्जन पुलिसवाले राजधानी लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों में जाकर गहन पड़ताल की, लेकिन महीने-दो महीने गुजरने के बाद हार मान ली और पूरी कवायद ठंडे बस्ते में डालकर चुप्पी साध ली। नतीजतन ग्यारह वर्ष बीतने के बाद भी न तो शवों की शिनाख्त हो सकी और न ही हत्यारे मिले। हालांकि लखनऊ पुलिस की यह कोई पहली नाकामी नहीं, इससे पहले भी कई घटनाओं के मामले में पुलिस की कलई खुल चुकी है।
सनद रहे कि गोसाईगंज क्षेत्र के ग्राम मस्तेमऊ के पास स्थित गंजरिया फार्म के जंगल में दो शव बबूल के पेड़ डाल से अगल-बगल लटकते मिले थे। मौके पर पहुंची पुलिस छानबीन के बाद शव प्रेमी-युगल के होने का संदेह जताते हुए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सामने आया कि ये दोनों लाशें युवकों की थी। पुलिस ने शवों की शिनाख्त कराने और हत्यारों की तलाश में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन ग्यारह साल बीतने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। लिहाजा पुलिस की विवेचना अभी भी पुलिस की फाइलों में गोते लगा रही है।
