आतंक पर आतंक आखिर इस मर्ज की दवा क्या है?

ISIS terrorist 1
  • जब चाहा और जहां चाहा आतंकियों ने घटना को अंजाम देकर खुली दे डाला फिर भी…
  • वारदात के बाद टूटती है नींद अब एक बार फिर जिम्मेदार अफसर जागे, घुसपैठियों को लेकर योजना व धरपकड़ हुई तेज

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। वाराणसी में शीतला घाट पर आरती के दौरान आतंकी हमला, पुलवामा में आतंकी हमला, पहलगाम में आतंकी हमला के बाद दस नवंबर 2025 को देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास बम ब्लास्ट ये घटनाएं बानगी भर है इससे पहले भी आतंकियों ने कई धमाके कर कईयों बेगुनाहों की जान ले चुके हैं। जब कोई आतंकी घटनाएं हुई तब देश व प्रदेश हाईअलर्ट जारी के साथ-साथ गहन चेकिंग अभियान।

आतंकी संगठनों के लोकल कनेक्शन खंगालने में जुटी ATS

महिला आतंकी डॉक्टर शाहीन शाहिद सहित अन्य आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि यूपी की चकाचौंध में पनाह लेना आतंकियों के लिए आसान हो गया है। यही वजह है कि देश के विभिन्न राज्यों से वारदात करने के बाद आतंकी यूपी का रूख कर रहे हैं। फरीदाबाद से लखनऊ निवासी डॉ शाहीन शाहिद के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर यह सच उभर कर सामने आया है कि ये लोग काफी दिनों से नई उम्र के पढ़े-लिखे युवाओं को दहशतगर्द बनाने का पाठ पढ़ाने के साथ आतंकी संगठन में भर्ती कर रही थी। यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के फरमान पर एटीएस, एसटीएफ और पुलिस अब आतंकी संगठनों के लोकल कनेक्शन को खंगालने के लिए पूरी तरह से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। दिल्ली बम धमाके में शामिल महिला डॉक्टर शाहिन सहित चार-पांच संदिग्ध डॉक्टरों का खूंखार चेहरा सामने आने से साफ हो गया है कि आतंकी संगठन के लिए लोकल एजेंट काम कर रहे हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि एटीएस और जांच एजेंसियों को कई ऐसे नाम मिलें हैं, जिनको लेकर होमवर्क कर रही है।

विधानसभा-लोकसभा के पहले हुए आतंकी हमले?

गहन गौर करें तो सात मार्च 2017 को राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र स्थित हाजी कॉलोनी में एक मकान में कुछ आतंकियों के होने की सूचना एटीएस को मिली ।इस सूचना पर मानो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एटीएस और पुलिस मौके पर पहुंची और घेरेबंदी कर मुठभेड़ के दौरान उक्त मकान में घुसे 24 वर्षीय संदिग्ध आतंकी कानपुर निवासी सैफुल्लाह सरताज मारा गया था। यह मुठभेड़ दोपहर करीब ढाई बजे से लेकर शाम तक चली थी। जांच पड़ताल में पता चला कि आतंकी सैफुल्लाह सरताज आतंकी संगठन खोरोसान ग्रुप के लिए काम कर रहा था। यही नहीं इसी दिन भोपाल में भी पैसेंजर ट्रेन के जनरल कोच में बम ब्लास्ट हुआ और दस से अधिक लोग जख्मी हुए थे।

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बताया जा रहा है कि इस मामले में तीन संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए गए थे। इसके अलावा वर्ष 2019 में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने आत्मघाती हमला किया, जिसमें देश की रक्षा करने वाले 40 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद 2025 में पहलगाम में आतंकियों ने 26 पर्यटकों में गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया था। इस घटना को लोग भुला भी नहीं पाए थे कि दस नवंबर 2025 को देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास बम ब्लास्ट कर आतंकियों ने 13 लोगों की जान ले ली थी।

अब घुसपैठियों पर ATS और पुलिस की नजर

11 अक्टूबर 2021 को चिनहट पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान तीन बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था, जबकि सात दिसंबर 2022 पचास हजार का इनामी बंगलादेशी डकैत बिलाल व एस खान को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। कुछ समय पहले राजधानी में खुद को असमी बताकर रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशियों की तलाश में ठाकुरगंज पुलिस ने कुड़ियाघाट के आसपास झुग्गियों में छापा मारकर वहां रहने वाले 80 लोगों का सत्यापन कराया और बाकी 220 लोगों को सत्यापन फार्म भरने की हिदायत दी थी। जब-जब देश व प्रदेश में कोई बड़ी वारदात हुई तो तब-तब जिम्मेदार अफसरों को सत्यापन कराने की याद आई, लेकिन कड़वा सच यह है कि दो-चार कदम आगे बढ़ने के बाद फिर पूरी कवायद ठंडे बस्ते में चली जाती है।

असम से बनवा रहे फर्जी पहचान पत्र

सूत्र बताते हैं कि राजधानी में अपनी जड़ें जमा रहे संदिग्ध बांग्लादेशी के बरपेटा जिले से फर्जी पहचान पत्र बनवाकर यूपी में दाखिल हो रहे हैं। बताते चलें कि कुछ समय पहले असम पुलिस की छानबीन में यह सच सामने आने के बाद अब खुफिया एजेंसियों बरपेटा में होने वाली जालसाजी पर नजरें गड़ा दी है। दिल्ली ब्लास्ट के बाद पहचान पत्र बनाने वाले गिरोहों के बारे में एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर छानबीन शुरू करने की तैयारी में जुट गई है। जानकार बताते हैं कि राजधानी की झुग्गी-झोपड़ियों में खुद को असमी बताकर रहने वाले संदिग्धों में बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी हैं। बताया जा रहा है कि बीते साल 2011 में गुडंबा पुलिस ने अपने इलाके में संदिग्ध बांग्लादेशियों का सत्यापन करवाया था, जिसमें अधिकतर बरपेटा के ही रहने वाले निकले थे। गुडंबा पुलिस ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह को सौंपी थी। डीजीपी ने उस रिपोर्ट के आधार पर पूरे शहर में छानबीन करवाई थी। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर पुलिस और खुफिया तंत्र की ओर से उस समय जमकर अभियान चला, लेकिन कुछ दिनों बाद ही पूरी कवायद ठंडे बस्ते में चली गई थी।

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