- यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त, 24 घंटों में 26 मौतें, दो दर्जन से अधिक जख्मी
- सड़क सुरक्षा की कवायद विभाग की फाइलों में लगा रहा गोते
- लापरवाही का नतीजा, जा रही लोगों की जानें
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। यूपी की सड़कें हत्यारों से भी बेरहम होती जा रही है। हत्या की तुलना में यहां छह या सात गुना मौतें सड़क हादसों में हो रही हैं। देश के सबसे बड़े राज्य के लिए दुर्भाग्य है कि यहां कोई दिन बाकी नहीं है, कहीं वाहनों की आमने-सामने की भिड़ंत तो कहीं डिवाइडर तो कहीं राजमार्गों पर बने कट लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते 24 घंटों के भीतर से अलग-अलग जिलों में दो दर्जन से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौतें हुई, जबकि कईयो घायल हुए। बढ़ती भीड़ और बेतरतीब ट्रेफिक बने वजह काल के मुंह में समा जाते हैं।
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गौर करें तो जिस तरह से सड़क हादसों में मौतों के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है इससे साफ है कि कहीं न कहीं संबंधित विभाग की बेइमानी साबित हो रही है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में की जा रही इंजीनियरिंग लोगों की जान की दुश्मन बन रही है। भव्य और सुंदर दिखने के लिए बनाए गए चौराहे या फिर जगह-जगह कट हादसे का सबब बन रहे हैं। आलम यह है कि आए दिन लोगों को को जाम से भी जूझना पड़ता है, वहीं सिलसिलेवार दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है। सड़क दुर्घटना की रोकथाम के लिए वैसे तो हर साल यातायात सुरक्षा का आयोजन किया जाता है, लेकिन यह अभियान चंद कदमों पर चलने के बाद फिर थम जाती है, नतीजतन आए दिन लोगों के खून से यूपी की सड़कें लाल हो रही है।
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