सब मनोकामना पूरा करेगा सोम प्रदोष व्रत…ऐसे करें पूजा

Lord Shiva Naya Look
  • सोमवार के दिन ने बढ़ा दिया व्रत का फल

नया लुक संवाददाता

हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शिव-पार्वती की आराधना करने से सभी प्रकार के रोग, दोष और कष्ट दूर हो जाते हैं। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उत्थान और मनोकामना पूर्ति का शुभ अवसर होता है। जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत फलदायी अवसर माना जाता है। नवंबर माह का पहला सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर, सोमवार को पड़ेगा। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और समृद्धि प्रदान करते हैं।

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सोम प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत इस बार तीन  नवंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, त्रयोदशी तिथि तीन नवंबर को सुबह 5:07 बजे शुरू होकर 4 नवंबर को सुबह 2:05 बजे समाप्त होगी। भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।

इस समय की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले, यानी प्रदोष काल में की जाती है। इस समय पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस बार प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:34 बजे से रात 8:11 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि लगभग दो घंटे 36 मिनट होगी।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ, साफ वस्त्र धारण करें।
  •  “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  •  शाम के समय पुनः स्नान करें और पूजन स्थल को शुद्ध करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
  •  गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें।
  •  भगवान शिव को चंदन, बेला के फूल, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित करें ।
  • रुद्राक्ष की माला से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  •  प्रदोष व्रत कथा को श्रद्धापूर्वक पढ़ें या सुनें।
  •  पूजन के बाद आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।

सोम प्रदोष व्रत महत्व

इस दिन व्रत रखने से भोलेनाथ की कृपा बरसती है। साथ ही जिन लोगों को संतान का सुख प्राप्त नहीं हो रहा हो उनको संतान का सुख प्राप्त होता है। साथ ही सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है। वहीं जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष है, वो लोग इस दिन व्रत रखकर भोलेनाथ की पूजा करें। साथ ही सफेद चीज, दूध और दही का दान करें। ऐसा करने से उनको चंद्र दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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सोम प्रदोष का विशेष फल

जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस व्रत को करने से चंद्रमा से संबंधित दोषों का निवारण होता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में हो या जीवन में मानसिक तनाव बना रहता हो, उन्हें सोम प्रदोष का व्रत अवश्य करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन करते हैं, उन्हें संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख का आशीर्वाद भी मिलता है।

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