काली चौदस को वीर वेताल की करें पूजा, होगी धन की बरसात..

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राजेन्द्र गुप्ता

जैसे-जैसे दिवाली करीब आती है, हममें से कई लोग इस त्यौहार के हर महत्वपूर्ण दिन को ध्यान से मनाते हैं। इन्हीं में से एक दिन है काली चौदस, जिसे भूत चतुर्दशी भी कहा जाता है। यह रात देवी-देवताओं और रक्षक शक्तियों की पूजा करने, तथा घर और मन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए मानी जाती है।

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काली चौदस की तारीख, समय और मुहूर्त

इस साल काली चौदस 2025 रविवार, 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 20 अक्टूबर दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। पूजा के लिए सबसे शुभ समय, जिसे काली चौदस मुहूर्त कहा जाता है, रात 10 बजकर 57 मिनट से 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अगर आप इस दिन पूजा या आराधना करना चाहते हैं, तो यही देर रात का समय सबसे उत्तम माना गया है। क्योंकि तिथि अगले दिन यानी 20 अक्टूबर तक चलती है, कई लोगों को लगता है कि पूजा अगले दिन करनी चाहिए। लेकिन परंपरा के अनुसार काली चौदस उसी रात मनाई जाती है जब चतुर्दशी की रात्रि होती है, इसलिए 2025 में यह 19 अक्टूबर की रात को ही मनाई जाएगी।

काली चौदस दिवाली से पहले क्यों मनाई जाती है?

काली चौदस नकारात्मक शक्तियों से रक्षा पाने का दिन माना जाता है। इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो माता दुर्गा का एक उग्र रूप हैं और जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। लोग इस दिन बुरी शक्तियों से बचाव की प्रार्थना करते हैं और अपने घरों को नकारात्मकता से मुक्त करते हैं। कुछ लोग अपने पूर्वजों की आत्माओं को भी याद करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं।

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काली चौदस पूजा कैसे करें?

कई लोग आधी रात के बाद श्मशान भूमि जाकर देवी कालरात्रि और अन्य रक्षक देवताओं जैसे वीर वेताल की पूजा करते हैं। घरों या मंदिरों में भी पूजा की जाती है। लोग दीपक जलाते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग शुभ समय देखने के लिए चौघड़िया का भी प्रयोग करते हैं ताकि सभी कर्म शुभ मुहूर्त में किए जा सकें। ध्यान रखने वाली बात यह है कि काली चौदस को रूप चौदस और नरक चतुर्दशी से भ्रमित नहीं करना चाहिए। ये तीनों अलग-अलग दिन हैं और इनका महत्व भी भिन्न है। काली चौदस का उत्सव भारत के पश्चिमी हिस्सों में, खासकर गुजरात में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है। हालांकि, इसका असली संदेश हर जगह एक ही है और वो है नकारात्मकता को दूर करना और जीवन में शुद्धता व सुरक्षा का आह्वान करना।

काली चौदस पर देवी काली का आशीर्वाद मांगना

इस दिन देवी पार्वती की काली के रूप में पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन काली की पूजा करने से कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। इसमें मुख्य रूप से शनि दोष के नकारात्मक प्रभावों को दूर करना, विवाह और धन में समृद्धि, दीर्घकालिक बीमारियों से मुक्ति और बुरी आत्माओं के प्रभाव से मुक्ति शामिल है। नरक चतुर्दशी के दिन देवी काली केंद्रीय महत्व की देवी हैं। देवी शक्ति के उग्र रूप को सभी नकारात्मक पहलुओं और दुष्ट तत्वों के विनाशक के रूप में जाना जाता है। उन्हें विनाश और उत्थान के चेहरे के रूप में भी जाना जाता है। काली चौदस पर उनका आशीर्वाद लेने से सभी नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा और शत्रुओं पर विजय सुनिश्चित होगी।

 

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