- साइबर अपराधी भी कम नहीं कहीं डिजिटल अरेस्ट कर तो कहीं हमदर्द बनकर खातों से उड़ा ले रहे रकम
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। यूपी पुलिस नामचीन अपराधियों को पकड़ने में भले कामयाब हो रही हो, लेकिन साइबर अपराधी या फिर अन्य जालसाज उसे लगातार चुनौती दे रहे हैं। इंटरनेट और मोबाइल के जरिए छेड़छाड़ से लेकर एटीएम की हेराफेरी या बड़ा ख्वाब दिखाकर आर्थिक अपराध धड़ल्ले से हो रहे हैं। हाईप्रोफाइल मामलों में तो पुलिस की रुचि भी है, लेकिन आम लोगों की शिकायतों पर सामान्य जांच-पड़ताल न होने से भी इन अपराधियों,का मनोबल बढ रहा है। साइबर अपराधियों की कारगुजारियां तो आए दिन सामने आ रही हैं। बीते दिनों की बात छोड़ दें तो नौ अक्टूबर 2025 विकासनगर क्षेत्र एक ऐसा मामला सामने आया कि यहां के रहने वाले सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंककर्मी सिद्धार्थ नाथ को 51 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे दो करोड़ 75 लाख रुपए साइबर अपराधियों ने ऐंठ लिए। शातिराना दिमाग वाले साइबर जालसाजों ने डराने के लिए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी बताया और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उनकी अदालत में पेशी तक करा दी। यह तो महज बानगी भर है ऐसे कई मामले हैं जो पुलिस के लिए चुनौती बने हैं । इससे पहले भी साइबर अपराधियों ने कई लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर उनकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाल चुके हैं। पुलिस ने कुछ मामलों का राजफाश किया, लेकिन इसके बावजूद भी इनके कुनबों में गिरावट के बजाए इजाफा होता जा रहा है।
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कदम-कदम पर ठगों का मकड़जाल
- आजमगढ़ जेल अधीक्षक को भी नहीं बख्शा नटवरलाल
लखनऊ अब ठगों की भी राजधानी है। ऊंचे रसूख और शासन में पहुंच का दावा कर बेरोजगारों को लूटने वाले कई गिरोह यहां सक्रिय हैं, चूंकि कई विभागों के मुख्यालय यहां हैं, इसलिए गैर जिलों के युवक आसानी से ठगों के जाल में फंस जाते हैं। यह तो राजधानी लखनऊ में हो रही लगातार जालसाजी का मामला है। यूपी के आजमगढ़ जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है कि पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। यहां की जिला जेल में बंद एक कैदी ने जेल अधीक्षक को भी नहीं बख्शा। वह चेकबुक चुराकर जेल अधीक्षक के खाते से 30 लाख से अधिक ले उड़ा। बताया जा रहा है कि इस जेल में बंद नटवरलाल कैदी 18 महीनों तक फर्जी दस्तखत कर रूपए निकालता रहा। इसकी भनक बीते 22 सितंबर को लगी जब दो लाख 60 हजार रुपए की धोखाधड़ी की। इसकी सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक आजमगढ़ ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसकी भनक लगते ही लखनऊ के आलाधिकारियों ने जेल अधीक्षक को जमकर फटकार लगाई।
यह तो महज बानगी भर है इससे पहले भी कई लोग बन चुकें हैं साइबर अपराधियों का शिकार
- इंदिरा नगर क्षेत्र स्थित लक्ष्मणपुरी निवासी एक कालेज की प्रोफेसर प्रमिला मानसिंह से 78,50 लाख रुपए की ठगी।
- कनाडा के रहने वाली सुमन कक्कड़ व उनकी बहन से 1,88 करोड़ रुपए ठग लिए।
- बाजार खाला क्षेत्र ऐसबाग निवासी सरकारी बैंक के पूर्व कर्मचारी प्रभात कुमार से 1,20 करोड़ रुपए ऐंठे।
- पीजीआई की एक महिला डॉक्टर रूचिका टंडन से 2,81 करोड़ ऐंठे।
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हजरतगंज क्षेत्र स्थित अशोक मार्ग पर रहने वाले डाक्टर पंकज रस्तोगी की पत्नी दीपा से 2,71 करोड़ रुपए की ठगी। ठाकुरगंज के पंचायती राज विभाग से सेवानिवृत्त कमल कांत मिश्र से 17 लाख 50 हजार रुपए वसूले। हजरतगंज निवासी मरीन इंजिनियर एके सिंह से 84 लाख रुपए की ठगी। विकासनगर निवासी सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंककर्मी सिद्धार्थ नाथ को 51 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे दो करोड़ 75 लाख रुपए ऐंठे।
