दैवीय शक्तियों का मालिक होता है जन्मकुंडली के 12 वां भाव में बैठा ग्रह

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  • आचार्य डॉ धनंजय मणि त्रिपाठी

लखनऊ। जन्मकुंडली का 6, 8 और 12 वां भाव ही ऐसे स्थान हैं जो समतल एक समानांतर रेखा में नहीं बल्कि ऊपर नीचे छुपे हुए हैं। जिसमें 6 भाव आधा जमीन के ऊपर आधार जमीन के नीचे पाताल की गहराइयों में जाता है। जन्मकुंडली का छठा भाव जुड़ा है जन्मकुंडली के आठवें भाव से गुप्त रूप से। जो अनंत गहराई और अगम कुएं के जैसा दर्शाता हो… अष्टम भाव अनंत पर ले जाकर खड़ा करता है। यानी 6 और 8 भाव गड्ढे हैं बाकी सभी भाव समतल हैं एक दूसरे के साथ। वहीं 12 भाव आकाश मंडल में लटका हुआ है यह 12 भाव छत है यहां समय कई गुणी रफ्तार से तेज़ चलता है, तो 6 और 8 में परस्पर उतनी ही धीमी होती है समय की रफ़्तार । 12 भाव छत है तो अष्टम भाव बिल्कुल नीचे ग्राउंड फ्लोर के भी नीचे जैसे कोई कुआं या गड्ढा खुदा हो उसमें बैठे को देख लेता है।

अब आते हैं द्वादश भाव पर…

12 भाव सबसे ताकतवर पोजिशन है क्योंकि यह कुंडली के सबसे ऊंचाई का स्थान है जैसे जातक का लग्न से उसका शरीर देखते हैं तो द्वादश चोटी का स्थान है जैसे सर के पीछे और ऊपर कोई हो। जब लग्न पर कोई ग्रह हो और द्वादश में कोई ग्रह हो तो जैसे लग्न वाले जातक के ऊपर कोई सिर के ऊपर बैठा हो या लटका हुआ हो। द्वादश का ग्रह नीचे की तरफ यानी खाना NO 1 से लेकर 11 में नहीं आता वो आना ही नहीं चाहता क्योंकि उसने यात्रा पूरी कर ली है 1 से लेकर 12 भाव तक अब उसे निकलने यानी मोक्ष का रास्ता ढूंढना उसकी उम्मीद है। इसलिए द्वादश का ग्रह दैवीय पकड़ वाला/या कहें गैबी ताकत का मालिक होता है उसको कुछ परा दुनिया वाली बातें या चीजें ज्यादा समझ आएंगी भले उसके पास अक्ल न हो पर 12 में बैठा ग्रह गैबी पकड़ यानी दैवीय पकड़ का स्वामी होता है

बाकी जन्मकुंडली पर निर्भर करेगा कि द्वादश भाव में बैठा ग्रह कितना हस्तक्षेप करेगा बाकी कुंडली के ग्रहों के समीकरण या जातक के जीवन में या जातक उस ग्रह से संबंधित कारक वस्तुओं को कितना प्लीज कर के खुश कर ले जाता है। पर द्वादश का ग्रह खर्च बढ़ाते हैं क्योंकि अब देखो यह बात बहुत गंभीर है…12 में बैठा ग्रह आपके खोपड़ी पर चढ़ा हुआ एक भार के जैसा कोई है जिसके पास आपका ही यानी लग्न वाले का ही सपोर्ट है पर अगर आप उसको कृपा कर के खुश नहीं कर पाओ और उससे मदद न ले पाओ तो आपकी मूर्खता है अन्यथा तो वो आपको भविष्य बताने से लेकर आगे आने वाले संकटों या सही रास्तों को भी आपके संज्ञान में लाएगा…. वरना आप उससे काम नहीं ले पाए तो भार बना बैठेगा आपको उसके हिसाब का खाना खर्च तो देना ही पड़ेगा वरना वो छीन तो लेगा ही उसका हक है। द्वादश भाव का ग्रह अगर आपको ज्यादा परेशान कर रहा है तो उसको केतु पकड़ाओ यानी केतु की कोई उपयोगी वस्तु उसके काम लायक उस तक पहुंचाओ आपका भी भला होगा और उसका भी भला हो। वरना यह 12 का ग्रह आपके ऊपर बेताल की तरह सवार होकर आपसे खींचेगा बस समझदार और अक्लमंद इंसान ही 12 में बैठे ग्रह को अपना साथी बना कर अपने जीवन का मार्ग सरल कर लेता है। मतलब द्वादश भाव में राहु जो आकाश में धुएं के रूप में विचरण करता है उसका आकाश के इस 12 वें पटल पर कब्जा है।

इसीलिए तो जब कोई ग्रह आता है 12 में वो माया के बड़े प्रभाव में फंस जाता है.. और उसे केतु की जरूरत पड़ती है। जिससे वो इस राहु रूपी माया के प्रभाव को केतु रूपी तलवार से काट कर ऊपर बढ़ जाए। 12 के ग्रह या द्वादश भाव के स्वामी के साथ केतु बहुत अच्छा है इसलिए क्योंकि द्वादश भाव का स्वामी अब कहीं भी बैठेगा तो उसको उस जगह भी कोई बंधन में नहीं डाल पाएगा अगर केतु साथ है तो हां यह अवश्य हो सकता है कि वो भाव ऐसा हों जहां केतु और वो ग्रह एक साथ भी अच्छा फल नहीं कर पाते और झगड़ते हैं आपस में पर गुरु का एक आध गोचर उस युति को भी ठीक करने लग जाता है।

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