हरतालिका तीज पर बनने वाले हैं पंचमहापुरुष योग, कई गुना मिलेगा व्रत का लाभ

Hartalika Teej 2020
  • अखंड सौभाग्य की कामना कर अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास करें महिलाएं
  • नवविवाहित महिलाएं पहला तीज का व्रत ससुराल में भूलकर भी ना करें वरना मिलेगा अशुभ परिणाम

महराजगंज। इस साल 26 अगस्त 2025 को महिलाएं तीज का व्रत रखेंगी। भाद्रपद महीने के तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज काफी महत्वपूर्ण व्रत में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना कर अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान भोलेनाथ का व्रत करती हैं। इस बार तीज के दिन एक या दो नहीं बल्कि पांच बेहतरीन और अद्भुत संयोग का निर्माण हो रहा है। जिससे तीज व्रत का फल कई गुना बढ़ जाएगा। इस साल 26 अगस्त को चार विशिष्ट योग का निर्माण हो रहा है। जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग, शोभन योग, गजकेसरी योग और पंचमहापुरुष योग का निर्माण हो रहा है।

ज्योतिषाचार्य डाॅ धनंजय मणि के मुताबिक इन चारों योग में से गजकेसरी योग को सबसे अधिक महत्वपूर्ण और शुभ फलदायी माना गया है। काफी लंबे समय के बाद ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जिस कारण तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को काफी फायदा होगा। महिलाओं को गजकेसरी योग में भगवान भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए। पूजन का मुहूर्त 25 अगस्त की दोपहर 12:34 बजे से प्रारंभ होकर 26 अगस्त की दोपहर 1:54 बजे तक रहेगा। इसलिए 26 अगस्त की दोपहर 1:54 बजे से पहले पूजन करना शुभ माना जाएगा।

ससुराल में भूलकर भी नहीं करना है हरितालिका तीज का व्रत, होगा अशुभ परिणाम

26 अगस्त को हरतालिका तीज को करने के लिए कई सारे नियमों का भी पालन करना होता है। हरतालिका तीज को काफी नियम के साथ किया जाना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार का व्यवधान आपका शुभ परिणाम को विपरीत परिणाम में बदल सकता है। हरतालिका तीज को लेकर लंबे समय से एक परंपरा रही है कि नव विवाहित कन्या के द्वारा अपने मायके में ही यह व्रत शुरू किया जाता है। हरतालिका तीज को लेकर कई सारी परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। अगर किसी युवती की शादी नई नई हुई हो और उसे पहली बार तीज का व्रत करना हो, तो यह परंपरा है कि वह इसकी शुरुआत अपने मायके से ही करेगी। तीज के पहले व्रत को ससुराल से नहीं रखा जाता है। इस दौरान नवविवाहित कन्या अपने मायके आती हैं और भगवान भोलेनाथ की पूजन आराधना करती है। काफी धूमधाम से भगवान भोलेनाथ के प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। इसके बाद ससुराल हो या मायका कहीं भी यह व्रत कर सकती हैं।

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