
Chennai: पति के किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने मात्र से उसे पत्नी के प्रति कानूनी रूप से क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक आरोप साबित करने के लिए केवल विवाहेतर संबंध का आरोप पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन पक्ष को अन्य आवश्यक तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित करना होगा।
जस्टिस सुंदर मोहन की पीठ ने मामले में मृत महिला के भाई की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।

जस्टिस सुंदर मोहन
पति पर अवैध संबंध और दहेज प्रताड़ना के आरोप
मामले में आरोप लगाया गया था कि महिला अपने पति के कथित विवाहेतर संबंध और दहेज के लिए प्रताड़ना से परेशान थी। इसी पृष्ठभूमि में महिला ने अपने डेढ़ साल के बच्चे के साथ आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पति पर दहेज की मांग और पत्नी के साथ क्रूरता करने के आरोप लगाए थे। हालांकि, 23 अप्रैल 2018 को महिला अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पति को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। निचली अदालत का मानना था कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए।
मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से अपील नहीं की गई। इसके बाद मृत महिला के भाई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पति को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों और निचली अदालत के निष्कर्षों पर विचार किया गया। अदालत ने कहा कि किसी पति का दूसरी महिला के साथ संबंध होना अपने आप में पत्नी के प्रति आपराधिक क्रूरता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आरोपों की प्रकृति और मामले की परिस्थितियों के अनुसार अन्य जरूरी तथ्यों का प्रमाणित होना भी आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी उल्लेख
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पिनाकिन महीपतराय रावल बनाम गुजरात राज्य मामले का भी संदर्भ दिया। हाई कोर्ट ने संबंधित कानूनी सिद्धांतों और उपलब्ध साक्ष्यों का आकलन करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
क्या है इस टिप्पणी का कानूनी अर्थ?
अदालत की टिप्पणी का आशय यह है कि विवाहेतर संबंध का आरोप और कानून के तहत क्रूरता का अपराध साबित होना अलग-अलग बातें हैं। किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के लिए संबंधित कानून के आवश्यक तत्वों और पर्याप्त साक्ष्यों का होना जरूरी है।
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2 thoughts on “पति का अवैध संबंध अपने आप में क्रूरता नहीं: मद्रास हाई कोर्ट”
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